नई दिल्ली : पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की अंदरूनी जंग खत्म करने के लिए तय सियासी फार्मूले से पर्दा हटते ही कांग्रेस में हलचल मच गई।
गुरुवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात कही तो कैप्टन सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को यह संदेश दिया कि यह सही फैसला नहीं है। इसके बाद दोनों खेमों में जोर आजमाइश व दबाव की सियासत तेज हो गई है। शाम को दोनों खेमों की बैठकें हुई।
हरीश रावत ने गुरुवार सुबह नई दिल्ली में बातचीत के दौरान सूबे की सियासत में कैप्टन-सिद्धू का संघर्ष लगभग खत्म हो जाने का एलान किया। कहा कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस हाईकमान के बीच हुई चर्चा के बाद समाधान का रास्ता निकल गया है।
सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के प्रस्ताव से जुड़े सवाल पर रावत ने कहा कि सुलह का फार्मूला इस विकल्प के आस-पास ही रखा गया है। रावत ने इशारों में साफ कर दिया कि सिद्धू प्रदेश कांग्रेस की बागडोर संभालेंगे।
उन्होंने यह भी साफ कहा कि कैप्टन पिछले साढ़े चार साल से हमारे मुख्यमंत्री हैं और बेशक कांग्रेस उनकी अगुआई में ही 2022 के चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि कैप्टन और सिद्धू मिलकर चुनाव में पार्टी की जीत की आधारशिला रखेंगे।
जैसे ही रावत का यह एलान मीडिया में आया, कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रिया हुई। सूत्रों के मुताबिक अमरिंदर सिंह ने सोनिया गांधी गांधी को फोन कर आपत्ति जताई।
राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा के अलावा वरिष्ठ नेता कमल नाथ और पूर्व कैबिनेट मंत्री अश्वनी कुमार ने भी एतराज जताया। वरिष्ठ नेताओं की इस प्रतिक्रिया के बाद सोनिया गांधी ने प्रदेश प्रभारी हरीश रावत को 10 जनपथ बुलाया।
इसके बाद रावत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नवजोत सिद्धू को अध्यक्ष बनाने की बात नहीं कही थी। उन्होंने कहा था कि फैसला इसी के इर्द-गिर्द हो सकता है। सिद्धू का नाम उन्होंने नहीं लिया।
यह माना जा रहा था कि गुरुवार को पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से यह एलान कर दिया जाएगा कि सिद्धू ही अध्यक्ष होंगे लेकिन रावत के बयान पर हलचल मची को देखते हुए हाईकमान ने एलान नहीं किया।
कैप्टन और सिद्धू ने कीं अलग-अलग बैठकें पार्टी की ओर से अध्यक्ष बनाए जाने का एलान न होने पर सिद्धू ने एक बार फिर दबाव की राजनीति करते हुए शाम को चार मंत्रियों व छह विधायकों से मुलाकात की।
सिद्धू ने मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के आवास पर कैप्टन विरोधी खेमे के अन्य मंत्रियों तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया व चरणजीत सिंह चन्नी के अलावा विधायक परगट सिंह, कुलबीर जीरा, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा व कुशलदीप ढिल्लों के साथ बैठक की। वहीं, कैप्टन खेमा भी सक्रिय हो गया है।
देर शाम कैप्टन ने भी अपने फार्म हाउस में सांसद जसबीर सिंह डिंपा, गुरजीत औजला और विधायकों में रमिंदर आंवला, फतेहजंग बाजवा आदि के साथ बैठक की। सुबह कैबिनेट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा और अरुणा चौधरी भी कैप्टन से मिले थे।
कैप्टन की पसंद से बनेंगे दो कार्यकारी अध्यक्ष, मंत्रिमंडल में होगा बदलाव : पार्टी सूत्रों ने कहा कि पंजाब में जातीय और सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखते हुए दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना लगभग तय है। सियासी समीकरण को संतुलित रखने के लिए हाईकमान कार्यकारी अध्यक्ष के लिए कैप्टन की पसंद को भी तवज्जो देगा।
पार्टी रणनीतिकारों के अनुसार संगठन में बदलाव की घोषणा होने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने मंत्रिमंडल का पुनर्गठन कर कुछ नए चेहरों को शामिल करेंगे तो कुछ विवादित चेहरों की छुट्टी भी होगी।

