एनएसए के तहत गिरफ़्तार मणिपुर के कार्यकर्ता को रिहा करेः सुप्रीम कोर्ट
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 नई दिल्ली : कोरोना के इलाज में गोबर और गोमूत्र के इस्तेमाल पर भाजपा नेताओं की आलोचना करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार मणिपुर के एक राजनीतिक कार्यकर्ता लीचोम्बम एरेंड्रो को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पांच बजे तक रिहा करने का आदेश दिया।

इसके बाद शीर्ष अदालत का आदेश तत्काल मणिपुर जेल अधिकारियों को भेजा गया और शाम करीब 4.45 बजे एरेंड्रो को रिहा कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि उन्हें एक रात के लिए भी जेल में नहीं रखा जा सकता।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि उन्हें बंदी बनाए रखना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।

जब सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह याचिका का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जवाब दाखिल करेंगे तो पीठ ने मामले को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

इससे पहले पीपुल्स रीसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस के सह-संयोजक लीचोम्बम एरेंड्रो के पिता एल. रघुमणि सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता शादान फरसातो ने कहा कि ऐसे मामले में एहतियातन गिरफ्तारी का प्रविधान इस्तेमाल किया गया है जिसमें साधारण दंडात्मक प्रविधान की भी जरूरत नहीं है। याचिका में एरेंड्रो की एनएसए के तहत एहतियातन गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है।

इसमें आरोप लगाया गया है कि ऐसा भाजपा नेताओं की आलोचना करने पर उन्हें सिर्फ दंडित करने के लिए किया गया है।

एरेंड्रो के पिता ने याचिका में दावा किया कि उनके पुत्र ने 13 मई को फेसबुक पर पोस्ट किया था कि गोबर और गोमूत्र कोरोना का इलाज नहीं हैं।

यह बयान कोरोना के कारण मणिपुर भाजपा अध्यक्ष की मौत के संदर्भ में कई भाजपा नेताओं द्वारा अपनाए जा रहे अवैज्ञानिक रुख और फैलाई जा रही गलत सूचनाओं की आलोचना के तौर पर दिया गया था। हालांकि इस पोस्ट को 13 मई को ही डिलीट कर दिया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस आलोचना के लिए एरेंड्रो को उसके खिलाफ शुरू किए गए आपराधिक मामले के कारण कुछ दिन हिरासत में गुजारने पड़े और जमानत मिलने के बाद वह एहतियातन हिरासत में है।

याचिका में इम्फाल पश्चिम जिले के जिलाधिकारी द्वारा 17 मई को जारी हिरासत आदेश और हिरासत के आधार को रद करने की मांग की गई है।

संबंधित अधिकारियों को इसके बाद एरेंड्रो को आजाद रखने के निर्देश देने की मांग भी की गई है। साथ ही अदालत से मुकदमे के खर्च के अलावा याचिकाकर्ता और उनके पुत्र के लिए उचित मुआवजा प्रदान करने का अनुरोध भी किया गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि एरेंड्रो की हिरासत शीर्ष कोर्ट के 30 अप्रैल के आदेश का उल्लंघन है और शीर्ष अदालत में अलग अवमानना याचिका दाखिल की गई है।

महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के वितरण पर स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान 30 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने केंद्र से लेकर पुलिस प्रमुखों तक अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि वे मदद की गुहार लगा रहे लोगों और उनके अनुरोध को इस आधार पर खामोश करने की कोशिश न करें कि वे इंटरनेट पर फर्जी शिकायतें कर रहे हैं।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि लोगों की ओर से मदद की गुहार समेत सूचनाओं के स्वतंत्र प्रवाह पर रोक के किसी भी प्रयास को अदालत की अवमानना की तरह लिया जाएगा।

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