नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद को बताया कि नोट छापने को मौजूदा संकट का विकल्प बनाना सरकार की योजना में शामिल नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संकट से उबरने के लिए नोट छापने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
सीतारमण ने बताया कि बीते वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी में 7.3 फीसद गिरावट का अनुमान है। उनका कहना था कि सरकार ने कोरोना संकट के दौरान पिछले वर्ष से अब तक अभूतपूर्व उपाय किए हैं, जिनके चलते बीते वित्त वर्ष में विकास दर की गिरावट इस स्तर पर सिमटती दिख रही है।
कई अर्थशास्ति्रयों और विशेषज्ञों ने सरकार को कोरोना संकट से पैदा हुई मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से उबरने के लिए करेंसी नोट छापने और रोजगार बचाने की सलाह दी है।
उल्लेखनीय है कि नोट छापने को राजकोषीय घाटे का मौद्रीकरण कहा जाता है। इसके तहत सरकार के खर्च की भरपाई के लिए आरबीआइ सरकारी सिक्युरिटीज की प्राथमिक बाजार से खरीदारी कर लेता है।


