नई दिल्ली : वरिष्ठ पत्रकारों एन राम और शशि कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि पेगासस के जरिये सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रतिष्ठित नागरिकों, नेताओं और पत्रकारों की जासूसी किए जाने संबंधी खबरों की शीर्ष अदालत के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाशीध से स्वतंत्र जांच कराई जाए।
इस याचिका पर आगामी कुछ दिन में सुनवाई हो सकती है। याचिका में इस बात की जांच करने का अनुरोध किया गया है कि क्या पेगासस स्पाइवेयर के जरिये फोन को हैक कर एजेंसियों ने भारत में स्वतंत्र भाषण और असहमति को अभिव्यक्त करने से रोकने का प्रयास किया।
याचिका में केंद्र को यह बताने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि क्या सरकार या उसकी किसी एजेंसी ने पेगासस स्पाइवेयर के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है और क्या उन्होंने इसका इस्तेमाल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निगरानी करने के लिए किया है।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि दुनिया भर के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों की जांच में पत्रकारों, वकीलों, मंत्रियों, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत 142 से अधिक भारतीयों को पेगासस के जरिये निगरानी के संभावित लक्ष्यों के रूप में पहचाना गया है।
याचिका में दावा किया गया है कि ‘सिक्योरिटी लैब आफ एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने निगरानी के लिए लक्ष्य बनाए गए व्यक्तियों के कई मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण के बाद पेगासस के जरिये सुरक्षा उल्लंघन किए जाने की पुष्टि की है।
याचिका में कहा गया है, सैन्य श्रेणी के स्पाइवेयर का उपयोग करके निगरानी निजता के उस अधिकार का उल्लंघन है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेदों 14 (कानून के समक्ष समानता), 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 21 (जीवन की सुरक्षा एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के तहत मौलिक अधिकार माना है।
इसमें कहा गया है कि पत्रकारों, डाक्टरों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के फोन को हैक करना संविधान के अनुच्छेद 19 (एक) (ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन से गंभीर समझौता है।


