बाढ़ का पानी उतरा तो नजर आया तबाही का मंजर, वीरान हुए गांवों में बिखरा पड़ा है मकानों का मलबा, राहत कार्य शुरू

Datia News : दतिया । बाढ तो जिले में थम गई और गुरुवार को सिंध नदी का पानी भी लगभग 16 से 18 फीट नीचे चला गया है, मगर यह बाढ़ अपने पीछे बर्बादी के मंजर छोड़ गई है। जिला प्रशासन ने बचाव कार्यों को बंद कर दिया है। अब राहत के कार्य शुरू कर दिए हैं। जिले के सेवढ़ा ब्लॉक में ही 2 दर्जन से अधिक मकान गिर गए हैं।

कई जगह रास्ते उखड़ गए हैं, तो कहीं कहीं पर हालात बद से बदतर हैं। जिले के 36 गांव में घुटने घुटने तक कीचड़ है। सुनारी, पाली तथा ओरीना जैस गांव तो बिल्कुल खाली हो गए हैं। यहां के ग्रामीणों को राहत शिविर में ठहराया गया है। अब यहां पर राहत कार्य और सुधार कार्य किए जा रहे हैं।

शासन ने अलग-अलग टीमें गठित बाढ़ प्रभावित गांवों में दलों को भेजा है। जिले के दतिया और सेवढ़ा के गांवों में 36 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए है। 11 गांव पूरी तरह खाली करवा लिए गए है। सर्वाधिक नुकसान सुनारी, पाली, भरसूला, तिलेथा, उचाड़, लांच आदि गांव में हुआ है।

जिले में सिंध नदी के किनारे बसे लगभग 52 गांव में से बाढ़ का प्रक्रोप करीब 36 गांव में पड़ा है। जिसमें से 18 गांव के लोग ज्यादा प्रभावित हुए है। सर्वेक्षण दल द्वारा खेतों पर फसलों की क्षति, पशु हानि एवं अतिवर्षा व बाढ़ से क्षतिग्रस्त आवासों का आंकलन गुरूवार से शुरू किया गया। इस दौरान कोई जनहानि नहीं होने का दावा प्रशासन ने किया है, जबकि बसई क्षेत्र में बारिश से मकान गिरने से एक बुजुर्ग की मौत हुई है।

इस आपदा में पुलिस व सेना की भूमिका रही। डबरा दतिया हाई-वे के नए पुल से आवागमन रोक दिया गया है। लेकिन पुराने पुल से आवागमन शुरू कर दिया गया है। हाई-वे के नए पुल को लेकर यह निर्णय पुल की तकनीकी जांच पर निर्भर करेगा। ग्वालियर से सेतु निर्माण विभाग के अधिकारी जांच करेंगे। राहत कार्य और नुकसानी आंकलन के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी है।

सब जगह सिर्फ तबाही का मंजर

जिले में इस बार 2.16 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बोवनी का लक्ष्य में से कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिसमें से करीब 10 से 12 हजार हेक्टेयर फसल तबाह हुई है। इसी तरह से पुल- पुलियाएं में से तीन प्रमुख पुल टूटे है। इनमें सेवढ़ा ब्लाक में रतनगढ़ माता वाले पुल को सेतु निर्माण विभाग को लगभग 19 करोड़ की क्षति अनुमानित है। सड़कों पर लगभाग 80 लाख रुपये मरम्मत पर खर्च होना है। जिले में 200 से अधिक कच्चे मकान धराशायी हो गए है।

अब शुरू होगा सर्वे का काम

बाढ़ प्रभावित लोगों को समुचित स्थानों पर रखने की व्यवस्था की गई। इन गांव के कुछ लोगों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से एवं भारतीय सेना के जवानों ने नाव के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। कलेक्टर संजय कुमार ने उक्त आशय की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में अतिवर्षा एवं बाढ़ के कारण ऐसे हालत 36 ग्रामों में निर्मित हुए हैं।

इन सभी गांव में बचाव एवं राहत काम चल रहा है। यह कार्य पूर्ण होते ही नुकसान के सर्वे का कार्य राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में सर्वेक्षण दल द्वारा शुरू किया जाएगा। सर्वेक्षण दलों का गठन भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। सर्वेक्षण दल द्वारा खेतों पर फसलों की क्षति, पशु हानि एवं अतिवर्षा बाढ़ से क्षतिग्रस्त आवासों का आंकलन किया जाएगा।

क्षति होने पर पीड़ित व्यक्तियों को शासन के नियमों के प्रावधानों के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सर्वेक्षण के कार्य में पूरी पारदर्शिता रखे जाने के साथ इस बात का विशेष ध्यान दिया जाएगा कि पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित न रहें।

उन्होंने कहाकि पुर्नवास एवं राहत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। ऐसे परिवार जिनका आवास ध्वस्त हो चुका है उन परिवारों को रहने, खाने के साथ आवास की भी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

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