बाढ़ पीड़ित परिवारों को मिलेगा 50 किलो आटा व कपड़े , कलेक्टर ने प्रभावितों से मिलकर कहा- हिम्मत रखें, सब ठीक होगा

दतिया : शुक्रवार को कलेक्टर संजय कुमार ने जिले के बाढ़ प्रभावित ग्रामों का को मुआयना कर ग्रामीणों से बाढ़ से हुई क्षति के नुकसान के संबंध में चर्चा कर जानकारी ली। कलेक्टर ने प्रभावित ग्रामीणों से कहाकि चिंता करने की बात नहीं है हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50 किलो गेंहूं के आटे की व्यवस्था भी की गई है।

कलेक्टर ने सेवढ़ा अनुभाग के ग्राम सुनारी, अंडोरा, कुलैथ आदि बाढ़ प्रभावित ग्रामों का भ्रमण कर बाढ़ से हुए नुकसान का भी जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से चर्चा कर बाढ़ की स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त कर राहत शिविरों का अवलोकन किया। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र बुधौलिया, एसडीएम अनुराग निंगवाल, तहसीलदार सुनील भदौरिया, जनपद सीईओ आदि उपस्थित रहे।

कलेक्टर ने ग्रामीणों को बताया कि पीड़ित परिवार को 50 किलो गंेहूं के आटा के साथ दाल, तेल, नमक, मसले आदि की भी व्यवस्था की जा रही है। ऐसे ग्रामीण जिनके मकान बाढ़ में ध्वस्त हो गए उन्हें पुनः निर्माण करें तथा गांव के लोगों को रोजगार के लिए न भटकना पड़े, इसके लिए गांव में ही रोजगार मूलक कार्य शुरू किए जाएंगे। कलेक्टर ने ग्राम सुनारी मंे सड़क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू करने के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सेवढ़ा को निर्देश दिए। कलेक्टर ने बताया कि बाढ़ के कारण मकानों, पशु एवं फसलों की हुई क्षति के आकंलन के लिए सर्वे दल बनाए गए।

कलेक्टर ने की बाढ़ की समीक्षा

कलेक्टर ने शुक्रवार को न्यू कलेक्ट्रेट में बाढ़ से हुई क्षति के आंकलन एवं सर्वे के लिए नियुक्त अधिकारियों की बैठक ली। बाढ़ से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा करते हुए कहाकि बाढ़ ने ग्रामीणों का सबकुछ छीन लिया है। ऐसी स्थिति में हमें पूरी संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उदारता के साथ सहायता करना है। कलेक्टर ने बताया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को 50 किलो गेंहूं के स्थान पर 10-10 किलो के आटा के थैले उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही तिरपाल (पाेलीथिन, तेल, मसाले, शक्कर, चाय पत्ती, नमक, मिट्टी का तेल, मोमबत्ती, आलू, प्याज, बच्चों के लिए कपड़े, बिस्किट आदि भी प्रदान किए जाएं। उन्होंने कहाकि बाढ़ पीड़ित गांवों में शुद्ध पीने के पानी की तथा जीवन रक्षक दवाईयांें की व्यवस्था रखी जाएं। चिकित्सकों का दल भी उक्त गांव का भ्रमण करें।

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