टेरर फंडिंग केस में एनआईए ने जब्त किए डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज, जम्मू कश्मीर में 46 जगहों पर की छापेमारी

श्रीनगर : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने रविवार को आतंकी फंडिंग मामले में जम्मू कश्मीर के 14 जिलों में 56 जगहों पर छापेमारी की। सभी छापे प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के नेताओं के घरों, मदरसों और फलाह-ए-आम (ट्रस्ट) के कार्यालयों पर मारे गए।

इस दौरान वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों के अलावा जिहादी साहित्य भी बरामद किया है। दिल्ली से श्रीनगर आए एनआइए में डीआइजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में यह पूरी छापेमारी की गई। यह छापेमारी केंद्रीय गृहमंत्रालय के विशेष निर्देश पर हुई है।

कश्मीर संभाग के सभी 10 जिलों श्रीनगर, बड़गाम, गांदरबल, बारामुला, कुपवाड़ा, बांडीपोरा, अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां और कुलगाम और जम्मू संभाग के चार जिलों रामबन, डोडा, किश्तवाड़ और राजौरी में एनआइए टीम ने जमात नेताओं के घरों और कार्यालयों को खंगाला। एनआइए प्रवक्ता ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ पांच फरवरी को टेरर फंडिंग के सिलसिले में मामला दर्ज किया था।

यह मामला उन सूचनाओं व तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया था जो इसकी पुष्टि करते हैं कि जमात का कैडर न सिर्फ जम्मू-कश्मीर और देश के विभिन्न हिस्सों में बल्कि विदेशों में भी जकात और बैतुल माल व अन्य प्रकार से दान लेकर उसका इस्तेमाल आतंकी व अलगाववादी गतिविधियों को फिर से गति देने के लिए कर रहा है। जमात अपने नेटवर्क से इस पैसे का इस्तेमाल हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के लिए कर रही है।

इसके अलावा वह कश्मीर के युवाओं को गुमराह कर अपना सदस्य बनाने और उन्हें राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए तैयार कर रही है। प्रवक्ता ने बताया कि सभी आवश्यक सुबूत जमा करने के बाद ही 14 जिलों में 56 जगहों पर छापे डाले हैं।

पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के 65 दस्तों की मदद ली : सूत्रों ने बताया कि पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के लगभग 65 संयुक्त दस्ते जिलावार तैयार किए थे। सभी दस्तों को एनआइए अधिकारियों के साथ तैनात किया ताकि छापेमारी के दौरान किसी जगह कोई दिक्कत न आए। यह अभियान सुबह करीब पांच बजे शुरू किया और दोपहर तक चला।

आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों में जमात का हाथ : जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर को केंद्रीय गृहमंत्रालय ने फरवरी 2019 को प्रतिबंधित कर दिया था। कश्मीर में आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों में जमात-ए-इस्लामी का प्रत्यक्ष-परोक्ष हाथ माना जाता है।

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन को कभी जमात का फौजी बाजू कहा जाता था। आज भी अधिकांश आतंकी संगठनों का कैडर किसी न किसी तरह से जमात की पृष्ठभूमि वाला ही है। जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर पर 30 वर्षों में दूसरी बार रोक लगाई है। इससे पूर्व 1990 से लेकर 1995 तक भी इसकी गतिविधियों पर रोक थी। 

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