बीजिंग : चीन ने लिथुआनिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है। उसकी नाराजगी की वजह लिथुआनिया का ताइवान को अपने यहां एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की अनुमति देना है।
लेकिन चीन के राजदूत वापस बुलाने के फैसले से यूरोपीय संघ से संबंध खराब हो सकते हैं। ताइवान द्वीप वर्ष 1950 से स्वतंत्र है, लेकिन चीन उसे बागी क्षेत्र मानते हुए उस पर अपना हक जताता है।
और चाहता है कि मुख्य चीन से उसे फिर से जोड़ दिया जाए। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ताइवान को अपने देश में एक प्रतिनिधि कार्यालय उसी के नाम से खोलने की अनुमति देकर लिथुआनिया ने कूटनीतिक रिश्तों का उल्लंघन किया है।
चीन सरकार लिथुआनिया के इस कदम का कड़ा विरोध करती है। साथ ही विरोध स्वरूप उसने अपना राजदूत वहां से बुलाने का फैसला किया है।
चीन ने लिथुआनिया सरकार से कहा है कि दुनिया में सिर्फ एक चीन है। इस संपूर्ण चीन की केवल एक सरकार है।


