नई दिल्ली : भारत-चीन के बीच स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रक्षा में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के 20 जवानों को पिछले साल पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध और संघर्ष के दौरान बहादुरी प्रदर्शित करने के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया है।
ये पदक स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विभिन्न केंद्रीय और राज्य पुलिस बलों के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित कुल 1,380 सेवा पदकों में शामिल हैं। पदकों की सूची में वीरता के लिए दो राष्ट्रपति पुलिस पदक (पीपीएमजी), 628 वीरता के लिए पुलिस पदक (पीएमजी), 88 विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (पीपीएम) और 662 सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक (पीएम) शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस (जेकेपी) के सब-इंस्पेक्टर अमर दीप और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के हेड कांस्टेबल काले सुनील दत्तात्रेय (मरणोपरांत) को वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक दिए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार जेकेपी ने अधिकतम 257 (एक पीपीएमजी और 256 पीएमजी) वीरता पदक प्राप्त किए हैं।
इसके बाद सीआरपीएफ को 151 (एक पीपीएमजी और 150 पीएमजी) मिले हैं। आइटीबीपी को मिले 23 वीरता पदकों में से 20 उन अभियानों के लिए हैं जो मई-जून, 2020 के दौरान लद्दाख में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के खिलाफ थे।
आइटीबीपी ने बताया कि 20 में से आठ कर्मियों को 15 जून को गलवन में मातृभूमि की रक्षा के लिए उनके वीरतापूर्ण कार्य, सावधानीपूर्वक योजना और सामरिक अंतर्दृष्टि के लिए पीएमजी से सम्मानित किया गया है। छह कर्मियों को फिंगर-4 क्षेत्र में 18 मई को हिंसक झड़प के दौरान वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए पीएमजी से सम्मानित किया गया है, जबकि बाकी छह कर्मियों को उसी दिन लद्दाख के हाट स्प्िरंग्स के पास उनकी वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए सम्मानित किया गया है।
बल के प्रवक्ता विवेक कुमार पांडेय ने कहा, ‘सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों की बहादुरी के लिए बल को दिए जाने वाले वीरता पदकों की यह सबसे बड़ी संख्या है।’ बल के तीन जवानों को छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प दिखाने के लिए पीएमजी से सम्मानित किया गया है। –


