काबुल : अमेरिकी सेना की वापसी के बाद अफगानिस्तान के नागरिक अब नई मुसीबतों से जूझ रहे हैं। काबुल एयरपोर्ट से निकासी अभियान बंद होने के बाद हजारों अफगान नागरिक सड़क के रास्ते देश छोड़ने की कोशिश में हैं। इसके लिए बड़ी संख्या में अफगान ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर पर पहुंच गए हैं।
युद्धग्रस्त देश के अंदरुनी हालात भी अच्छे नहीं हैं। खाद्य सामग्रियों का संकट है, महंगाई आसमान छू रही है और बैंकों में भारी भीड़ लग रही है। गहराते संकट के बीच उदार छवि पेश करने वाले तालिबान का असली चेहरा भी सामने आने लगा है और उसका आंतक और अत्याचार बढ़ गया है।
अफगानिस्तान में अमेरिका समर्थित सरकार का पतन और तालिबान के नियंत्रण के बाद प्रशासनिक शून्यता की स्थिति आ गई है। निकासी अभियान बंद होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। तालिबान शासन में सताए जाने के डर से हजारों अफगान नागरिक पलायन कर रहे हैं।
हवाई मार्ग से निकलने की स्थितियां समाप्त होने के बाद अब लोग बार्डर पर इकट्ठा हो रहे हैं। ईरान और पाकिस्तान के बार्डर पर हजारों लोग पहुंच गए हैं। इन देशों ने सीमा पर सख्ती कर दी है। किसी भी अफगान नागरिक को बार्डर पार नहीं करने दिया जा रहा। यही स्थिति मध्य एशियाई देशों की अफगानिस्तान से लगी सीमा पर है।
एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान के तोरखम बार्डर पर हजारों अफगान जमा हुए हैं और गेट खुलने का इंतजार कर रहे हैं। ईरान के इस्लाम कलां बार्डर पर भी हजारों अफगान नागरिक जमा हैं। यहां से कुछ लोग ईरान जाने में सफल भी हो गए हैं।
अफगानिस्तान के अंदरुनी हालात भी ठीक नहीं हैं। यहां प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव में खाद्य वस्तुओं की मनमानी कीमत वसूल की जा रही है। सबसे ज्यादा भीड़ बैंकों में लग रही है। नकदी के संकट के बीच लोग ज्यादा से ज्यादा पैसा निकाल लेना चाहते हैं, लेकिन लोगों को पैसे नहीं मिल रहे।
काबुल की बैंक पर एक महिला ने बताया कि कुछ ही देर पहले तालिबान लड़ाकों को कुछ महिलाओं की बुरी तरह पिटाई करते देखा गया है। महिला ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि तालिबान पहले से भी ज्यादा आतंक फैला रहा है।
तालिबान के सामने चुनौतियां बिना किसी प्रतिशोध के गनी सरकार को अपदस्थ करने वाले तालिबान को अब सरकार को चलाने, कर्मचारियों को वापस काम पर लाने और स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित करने के लिए जूझना पड़ रहा है। तालिबान नेता बार-बार बैंक खोलने और सरकारी कर्मचारियों से काम पर लौटने को रहे हैं। लेकिन बैंकों और सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति न के बराबर बनी हुई है। बैंकों के ज्यादातर कर्मचारी देश छोड़कर जा चुके हैं। विदेशी मदद मिलनी भी बंद तालिबान के सामने मानवीय संकट से निपटने की बड़ी चुनौती भी है।
भीषण सूखा के चलते ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शहरों में पलायन कर गए हैं। तालिबान के आने के बाद से कई देशों ने अफगानिस्तान को सहायता पहले ही रोक दी थी। अभी तक कोई सरकार नहीं बनने से मदद करने वाले देशों के सामने यह संकट पैदा हो गया है कि वो बात किससे करें।


