कोरोना के कारण आत्महत्या को भी कोविड -19 से मौत माना जाए, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि कोरोना पीड़ित व्यक्ति द्वारा की गई आत्महत्या को भी कोरोना से मौत माना जाना चाहिए। सरकार कोरोना से मौत के मामले में जारी दिशानिर्देशों में इसे भी कोरोना से मौत में शामिल करने पर विचार करे। कोर्ट ने कोरोना से मौत के मामले में

सरकार द्वारा तय किये गए दिशानिर्देशों पर संतुष्टि जताते हुए सरकार से कुछ पहलुओं पर विचार करने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने कोरोना से मौत पर मुआवजा देने के बारे में दिशानिर्देश तय करके अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ और समय दे दिया है।

मामले पर कोर्ट में 23 सितंबर को फिर सुनवाई होगी। ये निर्देश जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने वकील गौरव कुमार बंसल की याचिका पर दिए। इस मामले में कोर्ट ने गत 30 जून को विस्तृत आदेश दिए थे।

जिसमें केंद्र को कोरोना से मौत के मामले में अनुग्रह राशि दिए जाने के बारे में दिशा निर्देश तय करने का आदेश दिया था। साथ ही कहा था कि कोरोना से मौत के मामले में मौत का कारण कोरोना दर्ज होना चाहिए ताकि मरने वाले के परिजनों को घोषित योजनाओं का लाभ मिल सके। कोर्ट ने पहले जारी हो चुके मृत्यु प्रमाणपत्रों में भी सुधार के लिए एक तंत्र बनाने को कहा था।

आदेश पर आंशिक अमल करते हुए पिछले सप्ताह सरकार ने कोरोना से मौत के मामले में प्रमाणपत्र जारी करने के दिशानिर्देश जारी किए थे जिन्हें अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करके कोर्ट में पेश किया था।

जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक जहर से हुई मौत, हत्या, आत्महत्या और दुर्घटना से मौत को कोरोना से मौत नहीं माने जाने की बात कही गई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि हमने आपकी अनुपालन रिपोर्ट देखी है। रिपोर्ट ठीक है लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर पुनर्विचार की जरूरत है, जैसे कि आत्महत्या।

अगर किसी कोरोना पीड़ित ने आत्महत्या की है तो उसका क्या होगा। साफ तौर पर आत्महत्या के मामलों को कोरोना से मौत न मानना ठीक नहीं होगा। जहां आत्महत्या का कारण कोरोना था यानी व्यक्ति कोरोना पीड़ित था उसे कोरोना से मौत माना जाना चाहिए।

इसके अलावा सरकार यह भी बताये कि कमेटी कब बनेगी। पीठ ने कहा कि अस्पताल लोगों को क्या दस्तावेज देंगे क्योंकि ज्यादातर देखा गया है कि अस्पताल दस्तावेज नहीं देते। लोगों को कौन से दस्तावेज कमेटी के समक्ष देने होंगे। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है।

याचिकाकर्ता गौरव कुमार बंसल ने निमहांस की रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कोरोना पीड़ितों के खुदकुशी के मामलों को कोरोना के कारण आत्महत्या का दर्जा दिया गया है। बंसल ने ऐसी आत्महत्या को कोरोना से मौत मानने की मांग की। पीठ ने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर विचार करके कोर्ट को 23 सितंबर को बताएगी। साथ ही सरकार कोरोना से मौत के मामले में अनुग्रह राशि देने के आदेश की भी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करेगी। एक याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह सरकार के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर जोर नहीं देंगे। सरकार काम कर रही है। इस पर पीठ ने कहा कि अवमानना कार्यवाही समस्या का हल नहीं है। मेहता ने कोर्ट के सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि वह अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करेंगे।

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