चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर से बगावती स्वर तेज हो गए हैं। 80 में से 40 विधायकों ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर जल्द से जल्द विधायक दल की बैठक बुलाने की मांग की है। यह भी कहा है कि इस बैठक में दो केंद्रीय पर्यवेक्षकों को भी भेजा जाए।
उनके सामने ही विधायक अपनी बात रखेंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह पर अविश्वास जताने वाले कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा अपने साथी तीन मंत्रियों और कुछ विधायकों को साथ लेकर बुधवार सुबह से ही कांग्रेस के अन्य विधायकों से सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र पर हस्ताक्षर करवाते रहे।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार बुधवार शाम को प्रदेश महासचिव (संगठन) परगट सिंह और उसके बाद तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के आवास पर नेताओं में लंबी बातचीत का दौर चला। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने को लेकर बातचीत हुई।
बैठक में शामिल विधायकों ने मुख्यमंत्री पर अविश्वास जताया है। गौरतलब है कि इससे पहले 25 अगस्त को भी इसी तरह की एक बैठक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के आवास पर हुई थी। इसमें चार मंत्रियों सहित 20 विधायकों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अविश्वास जताया था।
यहां तक की चारों मंत्री और कुछ विधायक पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत से बात करने के लिए देहरादून और उसके बाद सोनिया गांधी से मिलने के लिए दिल्ली भी गए थे। परंतु सोनिया गांधी ने किसी को भी समय नहीं दिया और हरीश रावत को मामले को सुलझाने के लिए चंडीगढ़ भेजा था।
यहां हरीश रावत ने विधायकों से अलग-अलग बात की। रावत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू से भी मिले थे और मुख्यमंत्री से भी उन्होंने बात की। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह से नाखुश चल रहे खेमे ने परगट सिंह से उन विधायकों को मनाने के लिए कहा है जो 25 अगस्त की बैठक में तो शामिल थे लेकिन बाद में एकजुट नहीं रह पाए।


