नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की बोलती बंद करके सुर्खियों में आ गईं। पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा को पास करने वाली स्नेहा 2012 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं। स्नेहा गोवा की निवासी हैं, उनका बचपन भी गोवा में बीता है व प्रारंभिक शिक्षा भी उन्होंने वहीं से हासिल की।
पुणे के फग्र्युसन कालेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने वर्ष 2008 में जेएनयू में दाखिला लिया था। यहां उन्होंने जेएनयू के क्षेत्रीय अध्ययन विकास केंद्र (आरएसडीसी) से भूगोल विषय में अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई वर्ष 2010 में पूरी की।
स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नेहा ने जेएनयू के स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज में अपनी एमफिल की भी पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2011 में अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की। सरकारी नौकरी वाली परिवार की पहली सदस्य स्नेहा अपने परिवार में सरकारी सेवाओं में शामिल होने वाली पहली हैं। उनके पिता मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। भाई का बिजनेस है और मां शिक्षिका हैं। स्नेहा की पहली नियुक्ति स्नेहा दुबे की पहली नियुक्ति विदेश मंत्रालय में हुई थी। वह दिसंबर 2013 से अगस्त 2014 तक विदेश मंत्रालय में लैटिन अमेरिका और कैरेबियन मामलों की अवर सचिव रहीं।
अगस्त 2014 में उन्हें मैड्रिड में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया। अंतरराष्ट्रीय मामलों में पहले से ही थी रुचि जेएनयू में आरएसडीसी के अध्यक्ष प्रो. मिलाप पुनिया ने कहा कि स्नेहा ने जेएनयू का भी गौरव बढ़ाया है। जेएनयू को उन पर गर्व है। उन्होंने कहा कि शुरू से ही स्नेहा की अंतरराष्ट्रीय मामलों में रुचि थी। लेक्चर के दौरान वह अक्सर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर चर्चा करती थीं। जेएनयू में वर्ष 2008 में फ्रेंच स्नातक में दाखिला लेने वाले विनयकांत ने बताया कि कई मौकों पर उन्होंने देखा कि स्नेहा राष्ट्रवादी विचारों के करीब थीं।
हालांकि, वह छात्र राजनीति से दूर रहती थीं। वाद-विवाद में दिलचस्पी जेएनयू के प्रो. गोवर्धन दास ने बताया कि स्नेहा का बौद्धिक स्तर काफी मजबूत था। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वाद-विवाद करने में काफी रुचि थी। जेएनयू में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में स्नेहा वाद-विवाद प्रतियोगिता में सामाजिक और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विषयों पर जमकर बहस करती थीं। एमफिल की पढ़ाई के दौरान ही स्नेहा ने सिविल सेवा परीक्षा की भी तैयारी शुरू कर दी थी। उस दौरान वह जेएनयू के छात्रावास में ही रहती थीं।


