नई दिल्ली : किसान आंदोलन के बाद लखीमपुर खीरी घटना को लेकर पार्टी और सरकार पर परोक्ष सवाल खड़े कर रहे पीलीभीत सांसद वरुण गांधी, भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर हो गए हैं।
उनकी सांसद मां मेनका गांधी और बड़बोले राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी को भी बाहर जाना पड़ा। जबकि कठिन परिस्थिति में बंगाल में भाजपा का झंडा थामने और पार्टी की विचारधारा अपनाने वाले मिथुन चक्रवर्ती, दिनेश त्रिवेदी जैसे नए लोगों को इसमें जगह दी गई है।
केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी की भी कार्यकारिणी में वापसी हो गई है। बताया जाता है कि सात नवंबर को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में होगी।
लगभग सवा साल पहले व्यापक फेरबदल कर अपनी नई केंद्रीय टीम बनाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर दिया। संयोग कुछ ऐसा रहा कि टीम की घोषणा से कुछ पहले ही वरुण गांधी ने लखीमपुर खीरी घटना को लेकर एक वीडियो ट्वीट किया और परोक्ष रूप से संदेश दिया कि कार्रवाई नहीं हुई तो लोगों के मन में सरकार का अहंकार बैठ जाएगा।
हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार वरुण व मेनका को बाहर किए जाने के पीछे कारण सामंजस्य बनाना है। इसमें अधिक से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाता है। उत्तर प्रदेश से केंद्रीय व राज्य मंत्रियों की लंबी सूची होती है। वैसे चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश से कार्यकारिणी में 12 सदस्य, छह विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल किए गए हैं।
इसमें जातीय समीकरण का भी ध्यान रखा गया है। सूत्रों का मानना है कि कुछ लोगों को हटाए जाने के पीछे उनका प्रदर्शन भी है। मसलन पूर्व केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा, विजय गोयल, इंद्रजीत राव, अश्विनी कुमार चौबे। नए लोगों में मिथुन व दिनेश के साथ साथ केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और स्वपन दासगुप्ता का नाम प्रमुख है।
केंद्रीय पदाधिकारियों, मुख्यमंत्रियों, पूर्व मुख्यमंत्रियों व विशेष आमंत्रितों के अलावा जिस 80 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया है उसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, डा.मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, भूपेंद्र यादव, अनुराग ठाकुर व कई अन्य मंत्रियों के साथ साथ पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावडेकर भी शामिल हैं।


