कोयला संकट बिजली आपूर्ति की दिशा में बन सकता परेशानी, केंद्रीय विद्युत सचिव ने ईधर भंडारण पर दिया जोर

नई दिल्ली : बिजली आपूर्ति संकट से देश को बचाने के लिए ईधर के भंडारण पर जोर दिया जाने लगा है। कोयला संकट बिजली आपूर्ति की दिशा में परेशानी बन सकता है। केंद्रीय विद्युत सचिव आलोक कुमार ने गुरुवार को विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी को लेकर कम से कम एक महीने के लिए देश को आपूर्ति संकट से बचाने की खातिर रणनीतिक ईंधन भंडार के निर्माण की जरूरत पर जोर दिया है।

भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित दक्षिण एशिया विद्युत सम्मेलन मूविंग टुवर्ड्स सस्टेनेबल एनर्जी सिक्योरिटी में उन्होंने कहाकि देश में कोयले के इस संकट का मुख्य कारण विशेष रूप से आयातित कोयले की ऊंची कीमत है। देश में विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी को देखते हुए यह टिप्पणियां महत्व रखती हैं।

केंद्रीय विद्युत सचिव ने कहाकि हम खबरों में कोयले की बहुत अधिक कीमतों के कारण आपूर्ति में व्यवधान के बारे में पढ़ रहे हैं। कोयले, गैस और तेल की बहुत अधिक कीमत और आपूर्ति में व्यवधान के बारे में बात की गई थी जो कि चीन, सिंगापुर, यूके, यूरोप हर जगह हो सकता है।

उन्होंने कहाकि कम से कम दस वर्षों या उससे अधिक समय तक सभी देश, विशेष रूप से प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं, बेस लोड और ग्रिड संतुलन के लिए जीवाश्म ईंधन की आपूर्ति पर निर्भर होंगी। सचिव ने कहाकि हम आयातित ईंधन के इन आपूर्ति झटकों से खुद को कभी भी अलग नहीं कर पाएंगे। हमारे पास आयातित कोयले पर आधारित 17,000 मेगावाट क्षमता है.

और अगर आयातित कोयले की कीमतें अधिक हो जाती हैं तो वह क्षमता समाप्त हो जाती है। भारत में 24,000 मेगावाट क्षमता के गैस संचालित विद्युत संयंत्र हैं। वे भी व्यावहारिक रूप से बाहर हैं। इसलिए ऊंची कीमतें ऊर्जा सुरक्षा को बहुत चुनौतीपूर्ण बना देंगी, इसलिए हमें एक रणनीति का निर्माण करने की जरूरत है।

उन्होंने कहाकि हम इन ईंधनों कोयला, गैस, तेल के भंडार को बनाए रखने के बारे में सोचना शुरू करें ताकि अर्थव्यवस्थाएं लगभग एक या दो महीने के लिए आपूर्ति की कमी को समायोजित कर सकें और उनसे पार पा सकें।

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