दतिया. जिले की भांडेर विधानसभा अनुसूचित जाति की आरक्षित सीट पर बसपा से कांग्रेस के पूर्व मंत्री रहे महेंद्र बौद्ध के मैदान में उतरने से अब मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच में और भी कड़ा हो गया है. कांग्रेस प्रत्याशी फूलसिंह बरैया 1998 में बसपा से यहां का विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. उसके बाद अब तक 4 चुनाव लड़ने के बाद भी वह नहीं जीत पाए। भारतीय जनता पार्टी से रक्षा सिरोनिया जो पूर्व में कांग्रेस से विधायक थी, चुनाव मैदान में है। दूसरी और कांग्रेस ने फूलसिंह बरैया पर दांव लगाया है। इधर बसपा ने भी कांग्रेस से बगावत कर आए पूर्व गृहमंत्री को चुनावी रण में उतारा है। इन सब समीकरणों के बाद भांडेर विधानसभा का यह उपचुनाव और कड़ा हो गया है।
राजनीतिक कवायदों के बीच महेंद्र बोद्ध का टिकट बसपा से होने के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अपनी-अपनी तैयारियों को नई दिशा और जातिगत समीकरणों को संतुलन देना शुरू कर दिया है। चुनाव में अब जहां रोचकता बढ़ गई है, वहीं अब मुकाबला दलित जातियों के अलावा अन्य जातियों पर भी निर्भर होने लगा है।
तीनों ही प्रत्याशी दल बदल कर उतरे हैं चुनावी रण में
बताया जाता है कि भाजपा से चुनाव लड़ रही रक्षा सिरोनिया और कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे फूल सिंह बरैया तथा बसपा उम्मीदवार महेंद्र बौद्ध तीनों ही प्रत्याशी इस बार दल-बदल कर मैदान में जनता के सामने हैं। ऐसे कोई भी प्रत्याशी अब एक दूसरे पर दलबदलू या गद्दार जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं कर पाएगा। जो भी प्रत्याशी इन शब्दों का प्रयोग करेगा उसके दामन पर भी छींटे आना संभव है। जहां रक्षा सिरोनिया पहले कांग्रेस और अब भाजपा से चुनाव मैदान में उम्मीदवार है, वहीं महेंद्र बौद्ध भी लंबे समय से भांडेर विधानसभा में सक्रिय हैं। वे दल बदल कर अब मैदान में उतर चुके हैं। बसपा ने उन्हें टिकट देकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करवाई है।
बरैया फिर विवादों के घेरे में

चुनाव शुरू होने के साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी फूलसिंह बरैया विवादों में नजर आने लगे हैं। जबकि रक्षा सिरोनिया को मजबूत भाजपा संगठन का सहारा मिल गया है। इसके अलावा महेंद्र बौद्ध के पास भी कई जमीन से जुड़े सशक्त कार्यकर्ता हैं। महेंद्र बौद्ध कांग्रेस के शासन में शिक्षा मंत्री और गृहमंत्री रह चुके हैं और भांडेर विधानसभा क्षेत्र में ही उनका पैतृक गांव भी आता है। संतराम सिरोनिया जो कि रक्षा सिरोनिया के पति हैं और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक माने जाते हैं, इसके चलते उनके समर्थन में भी कई कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। ऐसी स्थिति में रक्षा सिरोनिया कांग्रेस और बसपा के लिए प्रबल प्रतिद्वंदी हैं। भाजपा की रक्षा सिरोनिया, कांग्रेस के फूल सिंह बरैया और बसपा के महेंद्र बौद्ध इन तीनों के बीच अब मुकाबला टक्कर का होना माना तो जा रहा है, किंतु चुनावी सरगर्मी के बीच कौन से दल का प्रत्याशी मतदान तक मतदाताओं को अपनी ओर रिझा पाता है, कि नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। दलगत छवि की बात करें तो बसपा यहां से मात्र एक बार ही अपना प्रत्याशी जीता पाई है, जबकि कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला लगभग बराबरी का रहा है।

