दतिया. चातुर्मास समिति के प्रचार मंत्री सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज के मार्गदर्शन एवं पावन सानिध्य में विराट अहिंसा महारैली एवं केशलोच समारोह आज 4 अक्टूबर को सोनागिर सिद्धक्षेत्र पर आचार्य पुष्पदंत सागर चातुर्मास समिति भारत एवं दिगंबर जैन जागरण युवा संघ रजिस्टर मुंबई द्वारा आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में आचार्यश्री आदर्श सागर महाराज, आचार्यश्री धर्म भूषण महाराज एवं आर्यिका कीर्ति मति, आर्यिका प्रसन्न मति आदि का सानिध्य प्राप्त होगा। भगवान महावीर स्वामी के संदेश को जन जन तक पहुंचाने के लिए इस अहिंसा रैली का प्रारंभ सुबह 8:45 बजे होगा। जिसमें 10 वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक के बच्चे गांधी वेशभूषा में तथा श्रावक श्राविका सफेद वस्त्र और केसरिया वस्त्रों में सम्मिलित होंगे।मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रैली का समापन अमोल वाली धर्मशाला में होगा। तत्पश्चात 9:45 बजे जैन धर्म की विशेष साधना कहीं जाने वाली केशलोच क्रिया होगी । जिसमें मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज अपने सर मूंछ, दाड़ी के बालों को अपने हाथों से उखाड़ेंगे एवं उपवास रखेंगे। इस कार्यक्रम में ग्वालियर संभाग से अहिंसा प्रेमी शिवपुरी, करेरा ,दतिया, डबरा, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, इंदौर, दिल्ली के भक्तजन सम्मिलित होंगे।
धर्मसभा का हुआ आयोजन
यौवन, सुंदरता कब विलीन हो जाएंगी कुछ पता नहीं। किस मोड़ पर जीवन का अंत हो जाए, कुछ निश्चित नहीं। इसलिए समझदारी इसीमें है कि जीवन रहते उसे कृतार्थ कर लिया जाए। क्योंकि मनुष्य जीवन का मिलना समुद्र में पड़े रत्न के मिलने से भी अत्यंत कठिन है, फिर उत्तम कुल, समीचीन सोच, उत्तम देश और आत्मकल्याण के परिणाम होना उत्तरोत्तर सब कुछ दुर्लभ है। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने शनिवार को सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि जीवन में कभी भयातीत नहीं होना चाहिए। जो भयातीत होता है, वही पाप कार्य करता है। भयातीत पुरुष कभी सत्य नहीं बोल सकता है। भयातीत पुरुष को क्षणभर भी शांति नहीं मिलती है। अशांति का मूल कारण भय ही है। निशंक पुरुष ही सुख का वेदन कर सकता है। निशंक-निर्भय जो होगा वही सत्य बोल सकता है।

