दतिया. भांडेर अनुभाग के ग्राम पिपरौआ में बीज ग्राम योजना के अंतर्गत विभाग के जिम्मेदारों ने मूंगफली का अमानक बीज किसानों को वितरित कर दिया. जब इस बीज का सैंपल जांच के लिए होशंगाबाद भेजा गया तो वहां उसकी अंकुरण क्षमता काफी कम होने पर उसके वितरण और भंडारण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए. उसके बाद हरकत में आए कृषि विभाग ने इस बीज के क्रय विक्रय और भंडारण पर रोक संबंधी आदेश आनन फानन में जारी कर दिए. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. जिन किसानों को यह अमानक स्तर का बीज बांटा गया था, उन्होंने अपने खेतों में उसकी बोवनी तक कर दी थी. जो बीज वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय विकासखंड भांडेर द्वारा दिया गया है, उसकी अंकुरण क्षमता महज 35 प्रतिशत है. अर्थात 100 बीज में से मात्र 35 बीज ही अंकुरित होंगे। ऐसे में जिन किसानों ने इस बीज का उपयोग किया है, उनको अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल रहा है. उन्हें इस बीज को बोने के बाद फसल में नुकसान उठाना तय है।
जांच के लिए सैपंल भेजने में देरी से किसानों को हुआ नुकसान
अमानक स्तर के मूंगफली बीज का लॉट क्रमांक 1518 जीएन एटी 9282 सी का प्रदाय राबिनी 48-49 बी सेक्टर औद्योगिक क्षेत्र गोविंदपुरा भोपाल की संस्था द्वारा किया गया था. जिसके नमूने को जांच के लिए तत्कालीन उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास दतिया आरएन शर्मा ने गत 18 अगस्त को पवारखेड़ा होशंगाबाद भेजा गया था. जहां यह बीज अमानक स्तर का पाया गया. इस मामले में कृषि अधिकारी ने जांच रिपोर्ट आने के बाद 11 अगस्त को एक पत्र के माध्यम से बीज को अमानक घोषित कर दिया गया और तत्कालीन उपसंचालक ने जिले में राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा प्रदाय इस मूंगफली के बीज के क्रय विक्रय व भंडारण तथा स्थानांतरण पर रोक लगा दी. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. यह अमानक बीज भांडेर अनुभाग में किसानों को वितरित किया जा चुका था. विभाग की इस लापरवाही से किसान अब अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.
आधा सैकड़ा किसानों को बांट दिया अमानक बीज
भांडेर अनुभाग में जांच से पहले ही मूंगफली का बीज वितरित कर दिया गया। सामान्य वर्ग श्रेणी में इस योजना के अंतर्गत ग्राम पिपरौआ का चयन कर यहां के 50 किसानों को जुलाई माह के दरम्यान प्रति किसान ढाई बीघा के लिए 30 किग्रा बीज के मान से मूंगफली का यह अमानक बीज बांटा गया. जिसमें 60 प्रतिशत अंशदान भी दिया गया. इसके लिए किसानों से 1128 रुपये भी जमा कराए गए. इस अमानक बीज पर जब तक कृषि विभाग द्वारा रोक लगाने की कार्रवाई की जाती उससे पहले ही किसानों ने प्रति बीघा 12 किग्रा के मान से अपने खेतों में बोवनी भी कर दी. विभाग की यह सैंपल जांच में की गई देरी अब भोले भाले किसानों को भारी पड़ रही है. उनके खेतों में मात्र 35 प्रतिशत ही फसल अंकुरित हो रही है. जिसे लेकर किसान चिंता में है। किसानों का कहना है कि विभाग की गलती का खामियाजा वो क्यों उठाएं. बीज मूल्य का जो 40 प्रतिशत अंशदान वह जमा कर चुके हैं उसे नियमानुसार विभाग को लौटाना चाहिए. अगर उनकी मांग नहीं सुनी गई तो वह आंदोलन करेंगे.
इनका कहना है-
1- बीज खराब था तो हमें दिया क्यों. हम तो बीज की बुवाई अपने खेत में कर चुके थे। लेकिन इस बार नुकसान दिख रहा है. पौधे में केवल दो-चार फलियां ही लग रही हैं. – अंजुम पत्नी रज्जब खान, कृषक पिपरौआ.
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2- मेरे पूर्ववर्ती के समय का यह मामला है और मैंने भी हाल ही में उपसंचालक का पद संभाला है. ऐसे में इस मामले में एसएडीओ भांडेर ही बेहतर बता पाएंगे. – डीएसडी सिद्धार्थ, उपसंचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग दतिया.
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3- अभी तक प्रदेश में ऐसी कोई नजीर नहीं है कि लेब परीक्षण उपरांत घोषित अमानक बीज की राशि बीज का उपयोग करने वाले किसानों को वापिस की गई हो. हालांकि उपसंचालक महोदय को जानकारी देने तथा उनके द्वारा संचालक से मार्गदर्शन मांगा गया है. राशि जो किसानों से प्राप्त हुई थी, वह भी अब तक हमारे पास ही है. इसके अलावा आरएईओ पिपरौआ को भी निर्देशित किया जाएगा कि वे फसल कटाई कर विभाग को रिपोर्ट करें. – बीपी अरजरिया, एसएडीओ भांडेर.


