विनम्र व्यक्ति ही मुक्ति के पथ पर आगे बढ़ पाता है- मुनिश्री
दतिया .विनम्रता से जीवन महान बनता है, विनम्र व्यक्ति ही मुक्ति के पथ पर आगे बढ़ पाता है। विनम्रता जीवन की सफलता की कुंजी है। धर्म हमें विनम्रता का पाठ सिखाता है। करुणा, दया, वात्सल्य में सभी गुण विनम्रता के साथ आगे विकसित होते हैं। जो व्यक्ति विनम्र है, वह ही आगे जाकर सफलता को छू जाता है। जिसमें इसका अभाव होता है, वह आगे जाकर कुछ कर नहीं पाता। उसे सफलता भी नहीं मिलती है। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर ने रविवार को सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सभागृह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन क्षण भंगुर है। इस शरीर में अधिक से अधिक परमार्थ के कार्य कर लेना चाहिए। आत्मा अनादिकाल से संसार सागर में भटकती रहती है। मनुष्य योनी ही वह चौराहा है जहां से वह मुक्ति के द्वारा खोल सकती है। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति सब कुछ करना चाहता है मगर करता कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सुख सुविधाएं चाहिए, लेकिन इसे हासिल करने के लिए वह मेहनत करना नहीं चाहता।मुनिश्री ने कहा कि जीवन में सुधार करना है तो साधना करनी पड़ेगी । आज व्यक्ति हताश और अफसोस अधिक करता है। जबकि भविष्य में आगे बढ़ने के लिए यह दोनों हानिकारक हैं। धर्म की साधन से जीवन वातावरण सही रहता है। साधना करने शरीर में ऊर्जा प्राप्त होती । उन्होंने कहाकि भगवान महावीर, भगवान श्रीराम, गुरुनानक देव जैसे जगतकर्ताओं ने सत्य पुंज के दीपक की रोशनी से जगत को प्रकाशित किया । सत्य कभी परिवर्तित नहीं होता, जो सत्य है वही मेरा है। सत्य की सत्ता का नाश नहीं होता और सदा शाश्वत रहता है।

इस मौके पर चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि सिद्धक्षेत्र सोनागिर तीर्थ में 22 नम्वर को 108 मंडली भक्तामर विधान एवं पिच्छी परिवर्तन समारोह के कार्यक्रम की पत्रिका का विमोचन समाज के गणमान्य लोगों के बीच किया गया।

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