76वां स्वतंत्रता दिवस : पीएम मोदी बोले – देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां पहली भ्रष्टाचार तो दूसरी परिवारवाद !

नई दिल्ली : भारत ने 76वां स्वतंत्रता दिवस मनाया इस अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत की ताकत इसकी विविधता में निहित है। उन्होंने देश को “लोकतंत्र की जननी” कहा और ‘अमृत काल’ के ‘पंच प्राण’ की गणना की – एक विकसित भारत का लक्ष्य, औपनिवेशिक मानसिकता के किसी भी निशान को दूर करना, अपनी जड़ों, एकता और कर्तव्य की भावना पर गर्व करना हैं

पीएम मोदी ने आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी उन्होंने कहा की मैं विश्व भर में फैले हुए भारत प्रेमियों को, भारतीयों को आजादी के इस अमृत महोत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं

साथ ही पीएम ने कहा की अमृतकाल का पहला प्रभात Aspirational Society की आकांक्षा को पूरा करने का सुनहरा अवसर है। हमारे देश के भीतर कितना बड़ा सामर्थ्य है, एक तिरंगे झंडे ने दिखा दिया है

हम वो जो नारी को नारायणी कहते हैं
प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में लिखा की हम वो लोग हैं, जो जीव में शिव देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नर में नारायण देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नारी को नारायणी कहते हैं, हम वो लोग हैं, जो पौधे में परमात्मा देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नदी को मां मानते हैं, हम वो लोग हैं, जो कंकड़-कंकड़ में शंकर देखते हैं

PM मोदी के भाषण की मुख्य बातें –
● भारत के संविधान के निर्माताओं का भी धन्यवाद करना चाहता हूं कि उन्होंने जो हमें federal structure दिया है। आज समय की मांग है कि हमें cooperative federalism के साथ-साथ cooperative competitive federalism की जरूरत है, हमें विकास की स्पर्धा की जरूरत है।

● नारी शक्ति : हम जीवन के हर क्षेत्र में देखें, खेल-कूद का मैदान देखें या युद्ध की भूमि देखें, भारत की नारी शक्ति एक नए सामर्थ्य, नए विश्वास के साथ आगे आ रही है। उनका भारत की 75 साल की यात्रा में जो योगदान रहा है, उसमें मैं अब कई गुना योगदान आने वाले 25 साल में नारीशक्ति का देख रहा हूं।

● देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां
1.पहली चुनौती – भ्रष्टाचार
2.दूसरी चुनौती – भाई-भतीजावाद, परिवारवाद

● आजादी का अमृत महोत्‍सव, अब अमृतकाल की दिशा में पलट चुका है, आगे बढ़ चुका है, तब इस अमृतकाल में सबका प्रयास अनिवार्य है। टीम इंडिया की भावना ही देश को आगे बढ़ाने वाली है। 130 करोड़ देश‍वासियों की ये टीम इंडिया एक टीम के रूप में आगे बढ़कर के सारे सपनों को साकार करेगी। इसी पूरे विश्‍वास के सा‍थ मेरे साथ बोलिए

25 साल का खाका
प्रधानमंत्री बोले मुझे लगता है आने वाले 25 साल के लिए हमें पंच प्रण पर अपनी शक्ति केंद्रित करनी होगा। जब मैं पंचप्रण की बात करता हूं तो पहला प्रण है कि अब देश बड़े संकल्‍प लेकर ही चलेगा। दूसरा प्रण है हमें अपने मन के भीतर, आदतों के भीतर गुलामी का कोई अंश बचने नहीं देना है।

तीसरी प्रण, हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। चौथा प्रण है एकता और एकजुटता। और पांचवां प्रण है नागरिकों का कर्तव्‍य, जिसमें प्रधानमंत्री भी बाहर नहीं होता, मुख्‍यमंत्री भी बाहर नहीं होता।

Share this with Your friends :

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter