बच्चों का डर दूर करने के लिए पहले चिकित्सकों ने खुद खाई दवा, फिर कराया कृमिनाशक गोली का सेवन : बताए बचाव के जरुरी उपाय

Datia News : दतिया। केंद्र सरकार की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत बच्चों के पेट में कीड़े हैं। इसीके तहत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की दतिया ब्रांच द्वारा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। बच्चों एवं उनके परिजनों में दवा का भय कम करने के लिए चिकित्सकों ने पहले दवा का सेवन किया। फिर बच्चों एवं उनके परिजनों को एल्बेंडाजोल नामक दवा का सेवन भी कराया।

इस दौरान आईएमए दतिया की अध्यक्ष डॉ.श्वेता यादव, सचिव डॉ. के.एम.वरुण, मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ.अर्जुन सिंह, सह अधीक्षक डॉ.सचिन यादव, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.राजेश गुप्ता एवं डॉ.प्रदीप उपाध्याय, डॉ.जगराम मांझी, आईएमए के कोषाध्यक्ष डॉ.के.पी.बरेठिया, ज्वाइंट सेक्रेट्री डॉ.डिम्पल भदकारिया, डॉ.संजीव शर्मा, नर्सिंग अधीक्षक बिजी अवस्थी एवं अन्य नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहा।

इस दौरान कृमि क्या है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है। इसके बारे में भी जानकारी दी गई। कृमि को सामान्य बोलचाल में पेट का कीड़ा कहते हैं। बच्चों में आमतौर पर तीन तरह के कृमि पाए जाते हैं। व्हिप कृमि, राउंड कृमि और हुक कृमि। कृमि के संक्रमण से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कृमि हमेशा गंदगी से ही होता है। नंगे पांव चलने से, गंदे हाथ खाना खाने से, साफ पानी न पीने से और खुले में शौच जाने से बच्चों में कृमि संक्रमण होता है।

ये नजर आते हैं लक्षण, करें ये बचाव : कृमि संक्रमण से बच्चों में कुपोषण हो जाता है। खून की कमी हो जाती है। शरीर में थकावट बनी रहती है और पढ़ाई में मन नहीं लगता है। अक्सर कृमि ज्यादा होने से जी मिचलाता है और दस्त, पेट दर्द, कमजोरी भी लगती है। बचाव के उपायों में कीड़े की दवा एल्बेंडाजोल बच्चों को खिलाएं। ध्यान रखें हमेशा साफ पानी पिएं। कुछ भी खाने से पहले हाथ जरूर धोएं, खाना ढंककर रखें। खुले में शौच नहीं जाएं और शौचालय का प्रयोग ही करें।

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