नई दिल्ली : भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है, जहा आदित्य- एल1 (Aditya-L1) को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है। यह प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य सूर्य की एकाधिक लेयर पर अध्ययन करना है।
आदित्य- एल1 का लक्ष्य है सूर्य के उपग्रह सूर्यकिरण को समझना और सूर्य की किरणों की व्यवस्था और गति को गहराई से अध्ययन करना है। इस प्रक्षेपण से भारत अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है और यह सूर्य के बारे में हमारे ज्ञान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करेगा है।
इस मिशन से होगा ये बड़ा फायदा : आदित्य- एल1 का प्रक्षेपण सफलता से मानव जीवन को कई तरीकों से फायदा होगा। इस प्रक्षेपण से हम सूर्य के विभिन्न पहलुओं को अध्ययन कर सकेंगे, जैसे कि सूर्य की तापमान वृद्धि, अद्भुत सूर्यकिरणों का पता लगाना, और इनके माध्यम से अंतरिक्ष में होने वाली परिवर्तनों को समझना।
ISRO के चेयरमैन, डॉ. विक्रम सराभाई ने इस सफल प्रक्षेपण को “भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की गरिमा का प्रतीक” कहा है। उन्होंने कहा, “आदित्य- एल1 के प्रक्षेपण से हम सूर्य के बारे में नए और महत्वपूर्ण डेटा को साझा करेंगे, जिससे हम सूर्य के प्रति हमारे ज्ञान को मजबूत करेंगे।”
भारत ने रचा नया कीर्तिमान : आदित्य- एल1 के प्रक्षेपण के साथ, भारत ने अंतरिक्ष में अपनी गरिमा को और भी मजबूती से साबित किया है और इसके साथ ही विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में एक नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
इस प्रक्षेपण के साथ, भारत सरकार ने अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार के लिए अपने प्रतिबद्धी दृष्टिकोण को पुनर्विचारित किया है, और यह दुनिया को दिखाने का संकेत है कि भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में अपनी बढ़ती हुई भूमिका के साथ मान्यता प्राप्त कर रहा है.

आदित्य-एल1 के उपकरणों को मुख्य रूप से क्रोमोस्फीयर और कोरोना सौर वातावरण का निरीक्षण करने के लिए ट्यून किया गया है। यथावस्थित यंत्र एल1 पर स्थानीय पर्यावरण का निरीक्षण करेंगे। ऑन-बोर्ड कुल सात नीतभार हैं, जिनमें से चार सूर्य की सुदूर संवेदन करने वाले और उनमें से तीन यथावस्थित प्रेक्षण करने वाले नीतभार हैं।
नीतभार और उनकी वैज्ञानिक जांच की उनकी प्रमुख क्षमता।
| प्रकार | क्र.सं | नीतभार | क्षमता |
|---|---|---|---|
| सुदूर संवेदन नीतभार | 1 | दृश्यमान उत्सर्जन रेखा कोरोनाग्राफ (वी.ई.एल.सी.) | कोरोना/ प्रतिबिंबन और वर्णक्रममापन |
| 2 | सौर पराबैंगनी प्रतिबिंबन टेलीस्कोप (एस.यू.आई.टी.) | फोटोस्फीयर और क्रोमोस्फीयर प्रतिबिंबन- संकीर्ण और ब्रॉडबैंड | |
| 3 | सौर निम्न ऊर्जा एक्स-रे वर्णक्रममापी (एस.ओ.एल.ई.एक्स.एस. ) | सॉफ्ट एक्स-रे वर्णक्रममापी: सन-एज़-ए-स्टार प्रेक्षण | |
| 4 | उच्च ऊर्जा एल1 ऑर्बिटिंग एक्स-रे वर्णक्रममापी (एच.ई.एल.1औ.एक्स.) | हार्ड एक्स-रे वर्णक्रममापी: सन-ए-ए-स्टार प्रेक्षण | |
| यथावस्थित नीतभार | |||
| 5 | आदित्य सौर पवन कण प्रयोग (ए.एस.पी.ई.एक्स.) | दिशाओं के साथ सौर पवन/कण विश्लेषक प्रोटॉन और भारी आयन | |
| 6 | प्लाज्मा विश्लेषक पैकेज (पी.ए.पी.ए.) | दिशाओं के साथ सौर पवन/ कण विश्लेषक इलेक्ट्रॉन और भारी आयन | |
| 7 | उन्नत त्रि-अक्षीय उच्च विभेदन डिजिटल मैग्नेटोमीटर | यथावस्थित चुंबकीय क्षेत्र ( Bx , By और Bz)। |
प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को दी बधाई : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रथम सौर मिशन, आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है।
Time and again our scientists have proved their might and brilliance. The nation is proud and delighted over the successful launch of Aditya L1, India’s first solar mission.
Kudos to the team @isro for this unparalleled accomplishment. It is a giant stride towards fulfilling PM… pic.twitter.com/XEacBvLxoj
— Amit Shah (@AmitShah) September 2, 2023
प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा : चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा जारी रखी है। भारत के प्रथम सौर मिशन, आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो के हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई।
After the success of Chandrayaan-3, India continues its space journey.
Congratulations to our scientists and engineers at @isro for the successful launch of India’s first Solar Mission, Aditya -L1.
Our tireless scientific efforts will continue in order to develop better…
— Narendra Modi (@narendramodi) September 2, 2023
संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए ब्रह्मांड की बेहतर समझ विकसित करने के क्रम में निरंतर हमारे वैज्ञानिक प्रयास चलते रहेंगे।”


