आईएआरआई- पूसा पढ़ने आने वाली छात्राओं को पीजी या किराए के कमरे की जरूरत नहीं होगी, कैंपस में किया गया इंतजार

नई दिल्ली :केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा, दिल्ली में कन्या छात्रावास “फाल्गुनी” व कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल (एएसआरबी) के “चयन भवन” का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी, डेयर के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, एएसआरबी के चेयरमैन डॉ. संजय कुमार, आईएआईआर के निदेशक डॉ. ए.के. सिंह भी उपस्थित थे।

समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार, कृषि क्षेत्र एवं कृषकों के विकास के लिए संकल्पबद्ध है और राज्य सरकारों के माध्यम से भी कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों तथा किसान हित में योजनाबद्ध ढंग से कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी चाहते हैं कि हमारे किसान आत्मनिर्भर व सशक्त बनें और इतने सार्म्थ्यवान हो कि देश के साथ ही दुनिया के बाजारों में भी पूर्ति कर सकें।

इसके लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के साथ ही विभिन्न योजनओं-कार्यक्रमों के माध्यम से काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि हमारे किसान कहीं भी पीछे नहीं रहने चाहिए, इसके लिए खेती को आधुनिक प्रौद्योगिकियों से भी जोड़ा जा रहा है। सेटेलाइट की मदद से भी कृषि क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री प्रोत्साहित कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं। किसानों को आय सहायता के लिए केंद्र सरकार द्वारा “प्रधानमंत्री किसान सम्मान” (पीएम किसान) योजना सहित कई योजनाएं चलाई जा रही है। 2047 तक देश को विकसित बनाने के संकल्प के साथ काम हो रहा है।

 मुंडा ने समारोह में उपस्थित झारखंड के आदिवासी किसानों का आव्हान किया कि उन्होंने यहां जिन उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया व प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान जो श्रेष्ठ पद्धतियां सीखी-समझी, उन्हें सूदरवर्ती क्षेत्रों तक आगे बढ़ाने में योगदान दें। श्री मुंडा ने कहा कि पूसा में दुर्लभ बीजों व पौधों के संरक्षण का काम भी किया जा रहा है। साथ ही, यहां पर गुणवत्ता व पौष्टिकता पर ध्यान देते हुए तेजी से शोध कार्य किया जा रहा है।

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