टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर से जुड़ेंगे प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव स्थल : 625 किलोमीटर लंबे मार्गों का उन्नयन, 5 हजार करोड़ रुपये की परियोजना

भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़ने के लिए प्रस्तावित टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर राज्य के वन्यजीव पर्यटन और सड़क अवसंरचना को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस कॉरिडोर के तहत पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाली सड़कों का उन्नयन किया जाएगा। कुल 625 किलोमीटर लंबाई के इन मार्गों के विकास पर लगभग 5 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक बाघों वाला राज्य है और यहां सबसे अधिक टाइगर रिजर्व स्थित हैं। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन स्थलों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। यह कॉरिडोर न केवल पर्यटकों के लिए आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा।

पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा लाभ : टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर का लाभ केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह मार्ग राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित अन्य पड़ोसी राज्यों के लिए भी आवागमन और व्यापार के लिहाज से उपयोगी सिद्ध होगा। पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय व्यवसाय, सेवाओं और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की संभावना है।

अटल प्रगति पथ से दिल्ली-एनसीआर होगी नजदीक
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के माध्यम से प्रदेश को कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इनमें चंबल अंचल के लिए प्रस्तावित अटल प्रगति पथ प्रमुख है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 12 हजार करोड़ रुपये है।

इसके पूर्ण होने पर मध्यप्रदेश से दिल्ली-एनसीआर की दूरी घटकर लगभग 3 से 4 घंटे रह जाएगी। इससे दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर और प्रमुख बंदरगाहों तक प्रदेश की पहुंच भी आसान होगी।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और अन्य परियोजनाएं : प्रदेश को भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के रूप में भी एक बड़ी परियोजना मिली है, जिसकी लागत करीब 9,716 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा भोपाल-इंदौर-प्रयागराज, जबलपुर-नागपुर और इंदौर-धुले-पुणे जैसे मार्गों पर भी कार्य प्रस्तावित है। ये परियोजनाएं विकसित भारत@2047 के लक्ष्यों की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।

दिसंबर 2027 तक पूर्ण होंगी परियोजनाएं : सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए कई सड़क परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

खंडवा बायपास, जबलपुर रिंग रोड, इंदौर-हरदा और रीवा बायपास जैसी योजनाओं की नियमित समीक्षा कर समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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