तलवार और तराजू से देश निर्माण में समानांतर योगदान देने वाला माहेश्वरी समाज जॉब सीकर नहीं, बल्कि सदैव जॉब क्रिएटर रहा है – अमित शाह
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जोधपुर, राजस्थान। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जोधपुर में आयोजित माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन एंड एक्सपो–2026 को संबोधित करते हुए समाज की भूमिका, संगठन की शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा तथा केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में गृह मंत्री ने कहा कि माहेश्वरी समाज का योगदान केवल किसी एक कालखंड तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ऐतिहासिक दौर से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक इसकी भूमिका देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि व्यापार, उद्योग, सेवा और संगठन के माध्यम से समाज ने समय-समय पर देश की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाला है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आजादी के बाद आर्थिक सशक्तिकरण तक, कई सामाजिक वर्गों ने देश के विकास में योगदान दिया है। ऐसे समाज, जो रोजगार मांगने की बजाय रोजगार सृजन पर जोर देते हैं, वे आर्थिक प्रगति की रीढ़ बनते हैं। उनके अनुसार, अगर हर समाज अपने स्तर पर आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे, तो राष्ट्रीय स्तर पर इसका प्रभाव स्वतः दिखाई देगा।

गृह मंत्री ने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और भारतीय भाषाओं के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर आगे बढ़ने के लिए विदेशी भाषाएं सीखना आवश्यक हो सकता है, लेकिन घरेलू स्तर पर मातृभाषा और भारतीय भाषाओं का प्रयोग समाज और संस्कृति को मजबूत बनाता है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान और विरासत का भी आधार है।

आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति की है। मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, डिजिटल लेन-देन और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है, जिससे भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति की ओर बढ़ा है। उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे नवाचार, तकनीक और कौशल विकास पर ध्यान देते हुए उत्पादन को और आगे बढ़ाएं।

कार्यक्रम के दौरान समाज सेवा, संगठनात्मक प्रयासों और सामाजिक सहयोग से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि संगठित प्रयास न केवल किसी एक समाज को, बल्कि पूरे देश को आगे बढ़ाने में सहायक होते हैं। कन्वेंशन का उद्देश्य भी इसी भावना के साथ व्यापार, संस्कृति और सामाजिक दायित्व के बीच संतुलन स्थापित करना रहा।

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