सोमनाथ (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के सोमनाथ में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत शक्ति, आस्था और आत्मगौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हजार वर्षों के संघर्षों और आक्रमणों के बावजूद आज भी सोमनाथ मंदिर के शिखर पर लहराता ध्वज भारत की जीवटता और सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश या पराजय का नहीं, बल्कि निरंतर पुनर्निर्माण और विजय का इतिहास है। जो शक्तियाँ इस मंदिर को मिटाने के उद्देश्य से आईं, वे इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गईं, जबकि सोमनाथ आज भी विशाल समुद्र तट पर पूरी गरिमा के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि निर्माण में समय लग सकता है, लेकिन सृजन की शक्ति शाश्वत होती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर प्रभास पाटन की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि भगवान शिव के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण और महाभारत काल से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हजार वर्षों की उस यात्रा का प्रतीक है, जिसमें भारत ने हर चुनौती के बावजूद अपनी पहचान और आस्था को जीवित रखा।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पर्व केवल अतीत की घटनाओं को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा लेने का माध्यम भी है। उन्होंने आह्वान किया कि देश की नई पीढ़ी अपने इतिहास, सांस्कृतिक मूल्यों और विरासत से जुड़े रहकर आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान दे।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता का संदेश कभी विनाश का नहीं रहा, बल्कि संतुलन, सहअस्तित्व और सृजन का रहा है। आस्था हमें घृणा नहीं सिखाती और शक्ति का अर्थ अहंकार नहीं होता। सोमनाथ हमें सिखाता है कि तलवार से नहीं, बल्कि संस्कार और चेतना से सभ्यताएँ जीवित रहती हैं।
उल्लेखनीय है कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ तथा मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में देशभर से संत, श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।


