स्पेस टेक नीति-2026 से मप्र बनेगा भारत का नया ‘स्पेस टेक’ हब : नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निभाएगा सशक्त भूमिका , नवाचार और अनुसंधान से युवाओं के लिए सृजित होंगे नए अवसर

भोपाल :  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 राज्य की वैज्ञानिक और खगोलीय विरासत को भविष्य-उन्मुख तकनीकी नेतृत्व में परिवर्तित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह नीति नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करेगी और मध्यप्रदेश को भारत की उभरती अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक सशक्त भागीदार बनाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप-टेक जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना, उच्च-कौशल रोजगार का सृजन करना और मध्यप्रदेश को एक अग्रणी स्पेस टेक हब के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से “प्राचीन भारत का ग्रीनविच” कहे जाने वाले उज्जैन (डोंगला) की खगोलीय विरासत को आधुनिक विज्ञान और एआई तकनीक से जोड़कर राज्य को अंतरिक्ष अनुसंधान के एक नए केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।


स्पेस टेक नीति-2026 : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में आयोजित मध्यप्रदेश क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 के दौरान मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 का शुभारंभ किया था। यह नीति राज्य को अंतरिक्ष एवं उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

स्पेस टेक नीति-2026 एक समग्र एंड-टू-एंड तकनीकी ढांचा प्रदान करती है, जिसमें अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम सभी चरणों का विकास किया जाएगा। नीति के अंतर्गत उपग्रह एवं प्रक्षेपण यान निर्माण, प्रणोदन प्रणाली, एवियोनिक्स, उन्नत सामग्री, असेंबली-इंटीग्रेशन-टेस्टिंग, मिशन संचालन, ग्राउंड स्टेशन, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस तथा एआई-आधारित उपग्रह डेटा विश्लेषण को शामिल किया गया है।


इन्फ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान को प्राथमिकता : नीति में अधोसंरचना और अनुसंधान एवं विकास को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत स्पेस टेक मैन्युफैक्चरिंग पार्क, पर्यावरणीय एवं ईएमआई/ईएमसी परीक्षण सुविधाएँ, प्रणोदन एवं वाइब्रेशन परीक्षण प्रयोगशालाएँ, क्लीन रूम, सैटेलाइट सिमुलेशन, एआई मॉडलिंग और बिग-डेटा एनालिटिक्स के लिए उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

पात्र स्पेस-ग्रेड अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए 40 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान और फोकस सेक्टर्स के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है।


स्टार्ट-अप और निजी क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा : नीति के अंतर्गत डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव, प्रोटोटाइप विकास अनुदान, बौद्धिक संपदा (आईपी) प्रतिपूर्ति सहायता तथा स्टार्ट-अप और एमएसएमई को प्रोत्साहित करने के लिए संरचित मैचिंग-फंड मॉडल शामिल किया गया है। इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्ष नीति और IN-SPACe सुधारों के अनुरूप निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।

नीति की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि उज्जैन में खगोल भौतिकी एवं अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान एवं विकास केंद्र की स्थापना है, जिससे उज्जैन की समृद्ध खगोलीय विरासत को आधुनिक विज्ञान और एआई तकनीक से जोड़ा जाएगा।

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