Datia news : दतिया। दतिया स्थित प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ पर बढ़ रही अव्यवस्थाओं पर नियंत्रण के उद्देश्य से प्रशासन और पीठ प्रबंधन ने सख्त कदम उठाए हैं। एसडीएम संतोष तिवारी द्वारा वनखंडेश्वर महादेव मंदिर को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं।
जिसके बाद श्री पीतांबरा पीठ परिसर में भी खुले में साधना पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। इन फैसलों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराना बताया गया है।
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब वनखंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में कोई भी व्यक्ति बैठकर साधना नहीं कर सकेगा। यदि कोई व्यक्ति मंदिर परिसर में साधना करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम संतोष तिवारी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर परिसर में लगातार भीड़, अव्यवस्था और विवाद की स्थिति सामने आ रही थी, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए यह आदेश लागू किया गया है। आदेश जारी करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए थे।
दो स्थानों पर हो सकेगी जप साधना : वहीं दूसरी ओर दतिया के प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ परिसर में भी अब खुले में बैठकर साधना (जप) पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
पीठ प्रबंधन ने साधकों और पंडितों के लिए केवल दो निर्धारित स्थल तय किए हैं। जिनमें मणिपुर धाम और नव निर्मित स्वामी साधना केंद्र। अब केवल इन्हीं स्थानों पर बैठकर साधना करने की अनुमति होगी। इस संबंध में परिसर में सूचना चस्पा कर दी गई है तथा नियमों के पालन की निगरानी के लिए एक समिति का गठन भी किया गया है।
दलाली पर लग सकेगी रोक : पीठ प्रबंधन का कहना है कि यह निर्णय परिसर में बढ़ती पंडागिरी और दलाली पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लिया गया है।
बीते कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं। अनाधिकृत लोग खुद को साधक या पंडित बताकर परिसर में बैठ जाते थे और श्रद्धालुओं को भ्रमित कर उनसे लेन-देन करते थे। इससे न केवल धार्मिक माहौल खराब हो रहा था, बल्कि आए दिन विवाद और बहस की स्थिति भी बन रही थी।
मंत्र दीक्षा वालों को ही मिलेगी अनुमति : पीठ प्रबंधन ने यह सख्त निर्णय लिया है कि अब केवल पीठ से विधिवत मंत्र दीक्षा प्राप्त साधक ही निर्धारित स्थलों पर साधना कर सकेंगे।
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहचान के लिए सभी साधकों को अपनी मंत्र पुस्तिका साथ रखना अनिवार्य होगा। समिति समय-समय पर इसकी जांच करेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।


