परीक्षा पे चर्चा 2026 में पीएम मोदी का छात्रों को मंत्र : मार्क्स नहीं, माइंडसेट से मिलेगी सक्सेस, बताया कैसे बढ़ेगा फोकस !

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “परीक्षा पे चर्चा 2026” कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए उन्हें पढ़ाई, जीवन और करियर से जुड़े कई अहम मंत्र दिए। कार्यक्रम में गुजरात, सिक्किम, मणिपुर, पंजाब, असम सहित विभिन्न राज्यों के छात्र-छात्राओं ने अपने सवाल प्रधानमंत्री के सामने रखे।

हर छात्र का अपना पैटर्न होता है : गुजरात से आई छात्रा सानवी आचार्य के सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि हर इंसान की पढ़ाई करने की शैली अलग होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—

“जैसे खाने में हर व्यक्ति का तरीका अलग होता है, वैसे ही पढ़ाई में भी हर किसी का अपना पैटर्न होता है। किसी की सुबह में पढ़ाई अच्छी होती है, किसी की रात में।”

प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे दूसरों की नकल करने के बजाय अपने तरीके पर भरोसा करें और जो सुझाव सही लगें, उन्हें अपने अनुभव से अपनाएं।

टीचर से एक कदम आगे चलो” : आयुष तिवारी के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि अगर कोई छात्र शिक्षक की स्पीड से पीछे रह जाता है, तो उसे पहले से पढ़कर क्लास में जाना चाहिए। “अगर आप टीचर से एक कदम आगे चलेंगे तो कभी पीछे नहीं रहेंगे।”

उन्होंने कहा कि पहले से पढ़ने से क्यूरियोसिटी बढ़ती है, फोकस अच्छा रहता है और समझ भी गहरी होती है।
कला और देशभक्ति को भी मिला मंच

कार्यक्रम के दौरान सिक्किम की श्रेया प्रधान ने तीन भाषाओं (हिंदी, नेपाली और बंगाली) में देशभक्ति गीत सुनाया, जिस पर प्रधानमंत्री ने उन्हें खूब सराहा। मानसी द्वारा प्रस्तुत प्रेरणादायक गीत पर पीएम मोदी ने उनकी माता को विशेष बधाई दी।

स्किल बनाम मार्क्स पर प्रधानमंत्री का संदेश : वेंकटेश के सवाल पर प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि “मार्क्स और स्किल दोनों जरूरी हैं, दोनों में संतुलन होना चाहिए।”

उन्होंने बताया कि लाइफ स्किल और प्रोफेशनल स्किल दोनों जीवन में अनिवार्य हैं। “किताबें डॉक्टर बनने में मदद कर सकती हैं, लेकिन डॉक्टर मरीजों के साथ काम करके ही बनता है।”

“सिर्फ महत्वपूर्ण सवालों पर मत अटको” पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर निर्भर रहने की आदत पर पीएम मोदी ने चेताया कि

“सिर्फ श्योर शॉट सवाल पढ़ने से जीवन नहीं बनता, पूरा सिलेबस मजबूत होना चाहिए।” उन्होंने क्रिकेटर का उदाहरण देकर समझाया कि जैसे खिलाड़ी पूरे शरीर को तैयार करता है, वैसे ही छात्र को पूरे ज्ञान क्षेत्र में मजबूत बनना चाहिए।

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