भोपाल : मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, ऊर्जा, न्यायिक सेवाओं और पेंशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में 2026-27 से 2030-31 तक की योजनाओं की निरंतरता, दूरस्थ क्षेत्रों में विद्युतीकरण, न्यायालयों के आईटी कर्मचारियों को आयु सीमा में छूट और नई पेंशन नियमावली को मंजूरी दी गई।
जनजातीय और महिला-बाल विकास योजनाओं को 7,133 करोड़ की स्वीकृति : मंत्रि-परिषद ने जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 7,133 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति दी। इसके अंतर्गत पीवीटीजी आहार अनुदान योजना, एकीकृत छात्रावास योजना, सीएम राइज स्कूल, आवास सहायता, छात्रवृत्ति योजनाओं और माध्यमिक शिक्षा मंडल को शुल्क प्रतिपूर्ति जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है, जिससे महामारी से प्रभावित बच्चों को सहायता मिल सकेगी।
धरती आबा अभियान के तहत हजारों घरों और संस्थानों में बिजली : धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 63,077 अविद्युतीकृत घरों और 650 शासकीय संस्थानों में बिजली पहुंचाने के लिए 366 करोड़ 72 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों का अंश शामिल होगा।
दूरस्थ और छोटी बसाहटों में सोलर व बैटरी आधारित ऑफ-ग्रिड प्रणाली से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि जहां लागत सीमा के भीतर है, वहां पारंपरिक विद्युत अधोसंरचना के माध्यम से विद्युतीकरण किया जाएगा।
न्यायालयों के आईटी कर्मचारियों को आयु सीमा में छूट : उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के आईटी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को एक बार के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया गया है। इससे वे तकनीकी संवर्ग की वर्तमान और भविष्य की भर्तियों में भाग ले सकेंगे।
नई पेंशन नियमावली को मंजूरी : मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 और पेंशन के सारांशीकरण से जुड़े नियमों को स्वीकृति दी है। इसके तहत पेंशन से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है ताकि समय पर मामलों का निपटारा हो सके।
परिवार पेंशन के पात्र सदस्यों में अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया है।


