रक्षा मंत्रालय ने 5 हज़ार करोड़ रुपये के दो प्रमुख रक्षा अनुबंधों पर किए हस्ताक्षर : भारतीय तटरक्षक बल के लिए एएलएच एमके-III और नौसेना के लिए वर्टिकल लॉन्च एसएचटीआईएल मिसाइल प्रणाली की खरीद !

नई दिल्ली । देश की समुद्री और हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को कुल 5,083 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। साउथ ब्लॉक में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में भारतीय तटरक्षक बल के लिए छह उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) एमके-III (समुद्री भूमिका) तथा भारतीय नौसेना के लिए सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च एसएचटीआईएल मिसाइल प्रणाली की खरीद को अंतिम रूप दिया गया।


एएलएच एमके-III (एमआर) : समुद्री सुरक्षा को मिलेगा नया बल : एएलएच एमके-III (एमआर) हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए 2,901 करोड़ रुपये का अनुबंध हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), बेंगलुरु के साथ ‘भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित’ श्रेणी के तहत किया गया है। इस पैकेज में परिचालन भूमिका उपकरण, इंजीनियरिंग सहायता तथा प्रदर्शन-आधारित लॉजिस्टिक सहायता भी शामिल है।

दोहरे इंजन वाले ये हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक एवियोनिक्स और उन्नत नेविगेशन प्रणालियों से लैस हैं। वे तटीय हवाई अड्डों के साथ-साथ समुद्र में तैनात जहाजों से भी संचालन करने में सक्षम होंगे। इनके शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल को कृत्रिम द्वीपों, अपतटीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों तथा मछुआरों और समुद्री पर्यावरण की रक्षा में उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी।

इस परियोजना के अंतर्गत 200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भागीदारी प्रस्तावित है। अनुमान है कि इससे लगभग 65 लाख मानव-घंटों का रोजगार सृजित होगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


वर्टिकल लॉन्च एसएचटीआईएल मिसाइलें : नौसेना की वायु रक्षा होगी सशक्त : भारतीय नौसेना के लिए 2,182 करोड़ रुपये का अनुबंध रूसी संघ की जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ किया गया है। इसके तहत सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च एसएचटीआईएल मिसाइलें और संबंधित मिसाइल होल्डिंग फ्रेम की आपूर्ति की जाएगी।

यह प्रणाली अग्रणी युद्धपोतों की वायु रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करेगी और विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों—जैसे लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन—के विरुद्ध प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेगी। बहुस्तरीय वायु रक्षा संरचना में इसका समावेश त्वरित प्रतिक्रिया, हर मौसम में संचालन और चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करेगा।


रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा ढांचा : यह अनुबंध भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रक्षा साझेदारी को और मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों समझौतों से देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, सामरिक संतुलन और परिचालन तत्परता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।

रक्षा मंत्रालय का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि भारत आधुनिक तकनीक और स्वदेशी क्षमताओं के समन्वय के माध्यम से अपनी रक्षा संरचना को निरंतर सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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