नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी गई है। सरकार ने एफडीआई नीति (Foreign Direct Investment) में संशोधन कर कुछ क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और समय-सीमा तय की है।
सरकार के इस फैसले के तहत अब कुछ निर्दिष्ट क्षेत्रों में आने वाले निवेश प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाएगा। इसका उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को तेज करना, कारोबार में सुगमता बढ़ाना और भारत में विनिर्माण व नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करना है।
वास्तविक स्वामित्व (Beneficial Owner) की परिभाषा तय : नई नीति के तहत अब निवेश करने वाली कंपनियों के वास्तविक स्वामित्व (Beneficial Ownership) को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यदि किसी निवेशक में सीमा साझा करने वाले देशों की 10 प्रतिशत तक गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी है, तो उसे कुछ शर्तों के साथ ऑटोमेटिक रूट के तहत निवेश की अनुमति दी जा सकेगी। हालांकि ऐसे मामलों में निवेश प्राप्त करने वाली कंपनी को संबंधित जानकारी डीपीआईआईटी (DPIIT) को देना अनिवार्य होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर को मिलेगा फायदा : कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, पॉलीसिलिकॉन और इन्गट-वेफर निर्माण जैसे क्षेत्रों में आने वाले निवेश प्रस्तावों पर प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सोलर सेल उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय नियंत्रण अनिवार्य रहेगा : सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि इन क्षेत्रों में निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों में बहुसंख्यक नियंत्रण भारतीय नागरिकों या भारतीय संस्थाओं के पास ही रहेगा। इसका उद्देश्य रणनीतिक क्षेत्रों में राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कोविड के बाद बने नियमों की समीक्षा : दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने प्रेस नोट-3 (2020) के तहत सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के लिए सख्त नियम लागू किए थे, ताकि भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोका जा सके। अब नई व्यवस्था के जरिए उन नियमों में आंशिक संशोधन किया गया है, जिससे निवेश प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और संतुलित बन सके।
निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बल : सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से स्टार्टअप, डीप-टेक कंपनियों और विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कंपनियों को नई तकनीकों तक पहुंच, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ने और भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

