नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के तेजी से बढ़ते सेवा निर्यात क्षेत्र को नई गति देने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक सेवा अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाया जाए। इसके लिए आईटी सेवाओं, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास से जुड़े कई बड़े सुधार प्रस्तावित किए गए हैं।
सेवा निर्यात में लगातार मजबूत प्रदर्शन : भारत का सेवा क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत ताकत बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से जनवरी के बीच भारत का सेवा निर्यात लगभग 348.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
वहीं वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सेवा निर्यात का योगदान देश की जीडीपी के लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो इस क्षेत्र की तेजी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाएं बनीं सबसे बड़ा आधार : भारत के सेवा निर्यात में सॉफ्टवेयर और आईटी आधारित सेवाओं का सबसे बड़ा योगदान है।
● कुल सेवा निर्यात में 40% से अधिक हिस्सा सॉफ्टवेयर सेवाओं का है
● आईटीईएस और बीपीओ सेवाएं लगातार तेजी से बढ़ रही हैं
● व्यावसायिक और प्रबंधन परामर्श सेवाएं भी तेजी से उभरते क्षेत्र बनकर सामने आए हैं
इन क्षेत्रों ने भारत को वैश्विक डिजिटल सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है।
क्लाउड सेवाओं और डेटा सेंटर को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन : केंद्रीय बजट में एक महत्वपूर्ण घोषणा के तहत भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से वैश्विक ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस कदम से उम्मीद है कि भारत में बड़े पैमाने पर क्लाउड कंपनियों और टेक निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा।
आईटी कंपनियों के लिए कर नियमों में सुधार : बजट में आईटी सेवाओं से जुड़े कई टैक्स और अनुपालन सुधार भी किए गए हैं।
मुख्य बदलाव :-
● आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सीमा 300 करोड़ से बढ़ाकर 2000 करोड़
● सॉफ्टवेयर, आईटीईएस और केपीओ सेवाओं को एक ही श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव
● एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (APA) प्रक्रिया को तेज करने की योजना
इन सुधारों से आईटी कंपनियों को टैक्स विवाद कम होने और व्यापार सुगमता बढ़ने की उम्मीद है।
रोजगार और कौशल विकास पर भी जोर : सेवा क्षेत्र देश में रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत बन चुका है। वर्तमान में यह क्षेत्र कुल रोजगार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है।
बजट में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
● अगले वर्ष 1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षण
● चिकित्सा पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा
● पर्यटन और गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम
एआई और डिजिटल तकनीक से मिलेगा नया बढ़ावा : भारत तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार :-
● एआई स्किल्स के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है
● देश में 1700 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) काम कर रहे हैं
● इन केंद्रों में लगभग 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं
यह भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण टेक और रिसर्च हब बना रहा है।
वैश्विक व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे अवसर : भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और आर्थिक साझेदारी समझौते किए हैं, जिससे भारतीय सेवा प्रदाताओं को वैश्विक बाजार में नई संभावनाएं मिल रही हैं।
इनमें प्रमुख हैं :-
● भारत–ब्रिटेन समझौता
● भारत–यूरोपीय संघ एफटीए
● भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग समझौता
● भारत–न्यूजीलैंड और ओमान समझौते
इन समझौतों से भारतीय पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय रोजगार और सेवा निर्यात के अधिक अवसर मिलेंगे।

