नई दिल्ली/लखनऊ : केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी समुद्री भारत विजन 2030 के तहत उत्तर प्रदेश में जलमार्ग आधारित परिवहन को लगातार मजबूती मिल रही है। इस पहल का उद्देश्य नदियों के माध्यम से माल परिवहन को बढ़ावा देना, लागत को कम करना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। इसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं।
राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) पर माल ढुलाई में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में जहां मात्र 5.05 मिलियन मीट्रिक टन माल का परिवहन हुआ था, वहीं 2024-25 तक यह आंकड़ा बढ़कर 16.38 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 13.30 मिलियन मीट्रिक टन माल की ढुलाई हो चुकी है, जो इस सेक्टर में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़ा विस्तार
राज्य में जलमार्गों के विकास के लिए कई परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इनमें सामुदायिक घाटों का निर्माण, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम की स्थापना और क्विक पोंटून मैकेनिज्म जैसे तकनीकी सुधार शामिल हैं। इनसे जलमार्गों की सुरक्षा और संचालन क्षमता में सुधार हुआ है।
वाराणसी पर विशेष फोकस
वाराणसी को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां जहाज मरम्मत सुविधा और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) जैसी परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इसके अलावा मझुआ-गाजीपुर और गाजीपुर-वाराणसी के बीच फेयरवे मेंटेनेंस का कार्य भी जारी है, जिससे बड़े जहाजों की आवाजाही सुगम होगी।
रोजगार और व्यापार को बढ़ावा
इन परियोजनाओं के माध्यम से न केवल परिवहन व्यवस्था बेहतर हो रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। साथ ही, उद्योगों को सस्ती और तेज परिवहन सुविधा मिलने से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से विकास जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख जलमार्ग आधारित व्यापारिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।

