मध्यप्रदेश में 5वीं-8वीं का रिजल्ट जारी : 95% से अधिक विद्यार्थी पास, बेटियों ने फिर मारी बाज़ी; स्कूल शिक्षा मंत्री ने पेश किए आंकड़े

भोपाल, 25 मार्च 2026। मध्यप्रदेश में स्कूली शिक्षा के स्तर को दर्शाते हुए कक्षा 5वीं और 8वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को परिणाम जारी करते हुए बताया कि इस वर्ष दोनों कक्षाओं में उत्तीर्ण प्रतिशत 90% से ऊपर रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का संकेत है। खास बात यह रही कि दोनों ही कक्षाओं में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया।

राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा आयोजित बोर्ड पैटर्न की इन परीक्षाओं में लाखों विद्यार्थियों ने भाग लिया था। परिणाम घोषित होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखने को मिला, जहां प्रति मिनट लाखों लोग अपने रिजल्ट देखने पहुंचे। बेहतर तकनीकी व्यवस्थाओं के चलते विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।


📊 कुल परिणाम: 5वीं और 8वीं में शानदार प्रदर्शन : कक्षा 5वीं का कुल परीक्षा परिणाम 95.14% रहा, जिसमें 96.19% छात्राएं और 94.15% छात्र उत्तीर्ण हुए। वहीं कक्षा 8वीं में कुल 93.83% विद्यार्थी पास हुए, जिनमें 94.98% छात्राएं और 92.74% छात्र शामिल हैं। यह आंकड़े प्रदेश में शिक्षा के बढ़ते स्तर को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।


🏆 संभाग और जिलों की रैंकिंग : कक्षा 5वीं के परिणामों में शहडोल संभाग ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद नर्मदापुरम, इंदौर, चंबल और जबलपुर संभाग का स्थान रहा। जिलों में नरसिंहपुर ने टॉप किया, जबकि डिंडोरी, बालाघाट और झाबुआ भी शीर्ष सूची में रहे।

वहीं कक्षा 8वीं में इंदौर संभाग ने बाजी मारी। इसके बाद नर्मदापुरम और शहडोल संभाग रहे। जिलों में फिर से नरसिंहपुर पहले स्थान पर रहा, जबकि अलीराजपुर, डिंडोरी और झाबुआ जैसे जिले भी टॉप 10 में शामिल रहे।


🌐 एक क्लिक में मिला रिजल्ट : विद्यार्थी अपना परीक्षा परिणाम राज्य शिक्षा केन्द्र की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। परिणाम जारी होते ही प्रति मिनट 1 लाख से अधिक लोगों ने वेबसाइट पर विजिट किया। इस बार विशेष सर्वर व्यवस्थाओं के चलते बिना किसी तकनीकी बाधा के लाखों विद्यार्थियों ने अपना रिजल्ट देखा और डाउनलोड किया।


📚 असफल विद्यार्थियों के लिए मौका : मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि जो विद्यार्थी परीक्षा में सफल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए पूरक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें छात्रों को केवल उसी विषय की पुनः परीक्षा देनी होगी, जिसमें वे असफल हुए हैं। सरकार का उद्देश्य सभी विद्यार्थियों को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देना है।


👨‍🎓 लाखों विद्यार्थियों की भागीदारी : इस वर्ष प्रदेश के 1.10 लाख से अधिक स्कूलों के लगभग 24 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें सरकारी, निजी स्कूलों के साथ-साथ मदरसे भी शामिल रहे। ग्रामीण क्षेत्रों से विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही, जो शिक्षा के विस्तार को दर्शाता है।


📝 परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था : राज्य शिक्षा केन्द्र ने इस वर्ष 12,943 परीक्षा केन्द्र बनाए थे, जहां सुचारू रूप से परीक्षाएं आयोजित की गईं। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 322 केन्द्रों पर किया गया, जहां 1 लाख से अधिक शिक्षकों ने योगदान दिया। मोबाइल एप के माध्यम से ऑनस्पॉट अंक प्रविष्टि कर परिणाम तैयार किया गया।

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