भोपाल। मध्यप्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल स्थित पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) में दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेशभर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक के अधिकारियों ने भाग लिया, जहां उन्हें सड़क सुरक्षा से जुड़ी नई रणनीतियों और तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस सेमिनार का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा के निर्देशानुसार किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के आंकड़े को नियंत्रित करना रहा। विशेषज्ञों ने अधिकारियों को यातायात प्रवर्तन और दुर्घटना जांच के आधुनिक तरीकों से अवगत कराया।
नई तकनीकों और योजनाओं पर दिया गया जोर : प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को पीओएस, आईटीएमएस और ई-चालान जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही पीएम राहत योजना (कैशलेस), राहवीर योजना और हिट एंड रन पीड़ित प्रतिकर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता मिल सके।
कानूनी प्रावधानों और AI तकनीक की जानकारी : सेमिनार में मोटर व्हीकल एक्ट-1988, सीएमवीआर-1989 और मध्यप्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स-1994 के अद्यतन प्रावधानों की भी विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ई-डार प्रणाली जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों को यातायात प्रबंधन में लागू करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
4E मॉडल से सड़क सुरक्षा को मजबूती : कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक टी.के. विद्याथी ने सड़क सुरक्षा के 4E मॉडल—एजुकेशन, इंजीनियरिंग, इंफोर्समेंट और इमरजेंसी केयर—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ओवरस्पीडिंग रोकने के लिए इंटरसेप्टर व्हीकल के उपयोग को बढ़ाने और ई-इंफोर्समेंट को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
प्रशिक्षण के बाद प्रमाण-पत्र वितरण : कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षणार्थियों को सफलतापूर्वक कोर्स पूरा करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस दौरान अभिनीत कुमार रंजन, राजेश मिश्रा, विक्रम सिंह रघुवंशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा दुर्घटनाओं में कमी लाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।

