काशी में गूंजेगा विक्रमादित्य का वैभव : 3–5 अप्रैल तक भव्य महानाट्य, बाबा विश्वनाथ को अर्पित होगी वैदिक घड़ी !

भोपाल : धर्म नगरी वाराणसी एक बार फिर भारतीय सांस्कृतिक वैभव की साक्षी बनने जा रही है। 3 से 5 अप्रैल तक बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आयोजित होने वाले भव्य त्रि-दिवसीय महोत्सव में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा। यह आयोजन न केवल भारत के गौरवशाली इतिहास को जीवंत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय कालगणना, संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि यह आयोजन मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसमें देश की सांस्कृतिक विरासत को नए आयाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्यायप्रियता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुँचाने का यह एक अनूठा प्रयास है। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा।


बाबा विश्वनाथ को समर्पित होगी वैदिक घड़ी : इस आयोजन का एक विशेष आकर्षण ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का लोकार्पण है, जिसे बाबा विश्वनाथ को अर्पित किया जाएगा। उज्जैन से शुरू हुई यह पहल अब काशी तक पहुंच रही है, जो भारतीय कालगणना प्रणाली के पुनर्जागरण का प्रतीक मानी जा रही है। इस घड़ी के साथ एक डिजिटल ऐप भी विकसित किया गया है, जो 180 से अधिक भाषाओं में समय और पंचांग की जानकारी उपलब्ध कराएगा।


महानाट्य में दिखेगा शौर्य, न्याय और संस्कृति का संगम : लगभग 1 घंटे 45 मिनट के इस भव्य नाट्य मंचन में 175 से अधिक कलाकार भाग लेंगे। मंच पर रथ, घोड़े, पालकी और ऊँट जैसे जीवंत दृश्य दर्शकों को प्राचीन भारत की झलक देंगे। अत्याधुनिक ग्राफिक्स और स्पेशल इफेक्ट्स के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, ‘सिंहासन बत्तीसी’ और ‘बेताल पच्चीसी’ जैसे प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।


नवरत्नों की विद्वता और ऐतिहासिक प्रसंग होंगे जीवंत : महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्न—कालिदास, वराहमिहिर सहित अन्य विद्वानों की भूमिका को प्रमुखता से दर्शाया जाएगा। साथ ही विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष और भारतीय ज्ञान परंपरा की रक्षा के प्रसंग भी दर्शकों को देखने को मिलेंगे।


प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक गतिविधियों का होगा आयोजन : महोत्सव स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियाँ भी लगाई जाएंगी, जिनमें भारतीय ऋषि परंपरा, शिव पुराण, मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा देगा।


सांस्कृतिक नवजागरण की ओर बड़ा कदम : यह महोत्सव ‘विक्रमोत्सव’ के व्यापक स्वरूप का हिस्सा है, जो देशभर में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनता जा रहा है। हजारों कलाकारों और लाखों दर्शकों की भागीदारी के साथ यह आयोजन भारतीय परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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