दतिया : मध्यप्रदेश बोर्ड परीक्षा 2026 के घोषित परिणामों में इस बार दतिया जिले के विद्यार्थियों ने संघर्ष और मेहनत की नई कहानी लिख दी। खास बात यह रही कि ग्रामीण पृष्ठभूमि और किसान परिवारों से आने वाली बेटियों ने प्रदेश स्तर की मेरिट सूची में जगह बनाकर जिले का गौरव बढ़ाया। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत इरादों से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
जिले के मेधावी छात्रों की बात करें तो कक्षा 12वीं में गायत्री यादव ने प्रदेश स्तर पर स्थान बनाकर जिले का गौरव बढ़ाया, वहीं कक्षा 10वीं में आशीष यादव, छवि यादव और तपस्या शर्मा ने मेरिट में जगह बनाई। इसके अलावा जिले की सूची में तन्मय शर्मा, संस्कार प्रजापति, नैंसी गुर्जर, पूर्वी दुबे, देव यादव, संदीप कुशवाह और महक मिश्रा जैसे विद्यार्थियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन सभी छात्रों की सफलता के पीछे उनके परिवारों का संघर्ष और शिक्षकों का मार्गदर्शन साफ दिखाई देता है।
परिणाम में गिरावट, लेकिन मेधावियों ने बढ़ाया मान : हालांकि जिले का कुल परीक्षा परिणाम पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कमजोर रहा। कक्षा 10वीं में इस बार करीब 50.19 प्रतिशत छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए, जबकि 12वीं में यह आंकड़ा 54.16 प्रतिशत रहा। इसके बावजूद मेरिट में जगह बनाने वाले विद्यार्थियों ने जिले की साख को बरकरार रखा और सकारात्मक संदेश दिया।
गायत्री यादव बनी प्रेरणा, IAS बनने का सपना : कक्षा 12वीं में गणित संकाय से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गायत्री यादव ने प्रदेश की मेरिट सूची में आठवां स्थान हासिल किया। किसान परिवार से आने वाली गायत्री ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम पाया है। उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर समाज के कमजोर वर्गों की मदद करना है। उनकी सफलता से पूरे गांव और परिवार में खुशी का माहौल है।
संघर्ष के बीच सफलता की मिसाल : इसी तरह कक्षा 10वीं में भी कई विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। मजदूर और किसान परिवारों से जुड़े इन छात्रों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया। संसाधनों की कमी, सीमित सुविधाएं और आर्थिक चुनौतियां इनके हौसलों को डिगा नहीं सकीं।
बेटियों ने संभाली कमान, गांवों में जश्न का माहौल : इस वर्ष बेटियों का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने न केवल मेरिट में स्थान हासिल किया, बल्कि परीक्षा परिणाम में भी लड़कों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। ग्रामीण इलाकों में इन सफलताओं ने उत्सव जैसा माहौल बना दिया है।

