जनकल्याण पर सीएम का फोकस : अधिकारियों को फील्ड में उतरने के निर्देश, गांवों में रात्रि विश्राम करें; छोटे किसानों की गेहूं खरीदी को दें प्राथमिकता

भोपाल  : प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक अमले को स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागीय आयुक्तों और कलेक्टरों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए फील्ड स्तर पर सक्रियता बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों में नियमित भ्रमण करें, लोगों से सीधे संवाद स्थापित करें और समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से गांवों में रात्रि विश्राम करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति समझने और उन्हें बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।

अभियानों में जनभागीदारी जरूरी, तभी मिलेगी सफलता : बैठक में “जल गंगा संवर्धन अभियान” और “संकल्प से समाधान अभियान” की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अभियानों की सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब आमजन की सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे जनसहयोग को बढ़ाने के लिए नवाचार करें और लोगों को इन अभियानों से जोड़ें।

उन्होंने बताया कि 12 जनवरी से 31 मार्च तक चले “संकल्प से समाधान अभियान” के माध्यम से 100 से अधिक योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाया गया है। वहीं जल संरक्षण के लिए शुरू किया गया अभियान 30 जून तक जारी रहेगा, जिसे और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

गेहूं उपार्जन में छोटे किसानों को प्राथमिकता : मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीदी व्यवस्था की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि छोटे किसानों की उपज की खरीद पहले की जाए और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी कलेक्टरों को खरीदी केंद्रों का निरीक्षण करने और वहां छाया, पानी, बारदाना, ओआरएस सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

अधिकारियों के अनुसार अब तक 1 लाख से अधिक किसानों से लगभग 4.96 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है और करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन पर विशेष जोर : मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय स्कूलों के बेहतर परिणामों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए। साथ ही सभी सांदीपनि विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएं और संभागीय मुख्यालयों में बर्न यूनिट स्थापित की जाए। गर्मी के मौसम को देखते हुए अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था पर सख्ती : मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम में पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही उन्होंने नगरीय निकायों को स्वच्छता अभियान को जल संरक्षण से जोड़ने और जनसहयोग से प्याऊ स्थापित करने के निर्देश भी दिए।

प्रदर्शन के आधार पर होगी कलेक्टरों की रैंकिंग : बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए कि प्रशासनिक कार्यों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए अब कलेक्टरों की रैंकिंग की जाएगी। अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि पीछे रहने वालों को सुधार के निर्देश दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।

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