भोपाल/लखनऊ : उत्तर भारत में कृषि विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से 24 अप्रैल को लखनऊ में एक महत्वपूर्ण उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस बड़े आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष मौजूदगी रहेगी, जिससे सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया है।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर भी शामिल होंगे। यह आयोजन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि खेती-किसानी के भविष्य को नई दिशा देने वाला एक मंच माना जा रहा है, जहां नीति, तकनीक और बाजार को एक साथ जोड़ने पर जोर रहेगा।
कार्यक्रम में उत्तर भारत के 6 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि एवं बागवानी मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, स्टार्टअप प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटेंगे। दिनभर चलने वाले सत्रों में किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, डिजिटल एग्रीकल्चर, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन और खाद्य तेल-तिलहन मिशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन में राज्यों द्वारा अपनाई जा रही नई कृषि तकनीकों और नवाचारों को भी साझा किया जाएगा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की इंटरक्रॉपिंग और धान की सीधी बुवाई जैसी पहलें केंद्र में रहेंगी, वहीं अन्य राज्यों के सफल मॉडल भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
इसके अलावा नकली खाद-कीटनाशकों पर रोक, उर्वरकों की कालाबाजारी नियंत्रण और संतुलित उपयोग जैसे मुद्दों पर भी मंथन होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन से छोटे और सीमांत किसानों के लिए टिकाऊ और बहुआयामी खेती के मॉडल को बढ़ावा मिलेगा।
समापन सत्र में कृषि विकास की दिशा तय करते हुए एक ठोस रोडमैप तैयार किए जाने की उम्मीद है, जो आने वाले समय में उत्तर भारत की कृषि व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेगा।

