आईएफएफआई-57 को मिला नया नेतृत्व : फिल्म निर्माता आशुतोष गोवारिकर बने महोत्सव निदेशक,गोवा में होगा आयोजन !

नई दिल्ली :  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गोवा में आयोजित होने वाले 57वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के लिए प्रख्यात फिल्म निर्देशक Ashutosh Gowariker को महोत्सव निदेशक नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को भारतीय सिनेमा जगत के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे महोत्सव को नई दिशा और दृष्टि मिलने की उम्मीद है।

फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले गोवारिकर का इस प्रतिष्ठित महोत्सव से जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने 1980 के दशक से लेकर हाल के वर्षों तक इस मंच से जुड़े विभिन्न अनुभव साझा किए हैं। अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने इसे गर्व और जिम्मेदारी का विषय बताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक महोत्सव की विरासत को आगे बढ़ाना उनके लिए सम्मान की बात है।

दशकों पुरानी विरासत, वैश्विक पहचान
International Film Festival of India की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी और आज यह एशिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल है। यह महोत्सव न केवल भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करता है, बल्कि दुनिया भर की उत्कृष्ट फिल्मों और फिल्मकारों को भी एक साझा मंच पर लाता है।

हर वर्ष आयोजित होने वाला यह महोत्सव सांस्कृतिक आदान-प्रदान, रचनात्मक सहयोग और नई प्रतिभाओं के प्रोत्साहन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां अनुभवी फिल्मकारों के साथ-साथ उभरते कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।

गोवा बनेगा सिनेमा का वैश्विक केंद्र : नवंबर 2026 में Goa में आयोजित होने वाला IFFI-57 एक बार फिर सिनेमा प्रेमियों के लिए खास रहेगा। समुद्री तटों के बीच आयोजित इस महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, विशेष स्क्रीनिंग, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और फिल्म बाजार जैसी विविध गतिविधियां होंगी।

यह आयोजन तकनीक, कहानी कहने की शैली और सांस्कृतिक विविधता के नए आयामों को सामने लाने का मंच बनेगा। आयोजन में विभिन्न देशों की भागीदारी से इसे और भी व्यापक वैश्विक स्वरूप मिलने की उम्मीद है।

नई ऊर्जा, नई दिशा : गोवारिकर की नियुक्ति को महोत्सव के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उनके अनुभव और दृष्टिकोण से IFFI को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है, जिससे भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिल सकेगी।

फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह महोत्सव आने वाले समय में भारत को अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

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