सेमीकंडक्टर सेक्टर को बड़ा बूस्ट : ₹3,900 करोड़ से अधिक निवेश वाली दो नई इकाइयों को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली :  देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दो नई विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल ₹3,900 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद है।

यह पहल भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य देश में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है। सरकार का फोकस अब केवल चिप डिजाइन तक सीमित नहीं रहकर निर्माण, पैकेजिंग और नई तकनीकों के विकास पर भी है, जिससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके।

गुजरात बनेगा नया सेमीकंडक्टर हब : मंजूर की गई दोनों परियोजनाएं गुजरात में स्थापित की जाएंगी। इनसे लगभग 2,200 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

पहली परियोजना के तहत क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड द्वारा धोलेरा में मिनी और माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले निर्माण के लिए एक अत्याधुनिक सुविधा केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह देश में गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित अपनी तरह की पहली व्यावसायिक इकाई होगी, जो बड़े डिस्प्ले से लेकर स्मार्ट डिवाइसेज और एक्सआर तकनीक तक के लिए उत्पाद तैयार करेगी।

दूसरी परियोजना के अंतर्गत सूचि सेमिकॉन प्राइवेट लिमिटेड सूरत में एक सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग (OSAT) यूनिट स्थापित करेगी। इस इकाई में सालाना करोड़ों चिप्स के उत्पादन की क्षमता होगी, जो ऑटोमोबाइल, औद्योगिक स्वचालन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में उपयोग किए जाएंगे।

बढ़ेगा आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल : इन नई परियोजनाओं के साथ देश में स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाओं की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जिनमें कुल निवेश लगभग ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। इससे स्पष्ट है कि भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सरकार द्वारा शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को दिए जा रहे समर्थन से चिप डिजाइन और इनोवेशन के क्षेत्र में भी तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नई इकाइयों से न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूती मिलेगी।

भविष्य की तकनीक में भारत की मजबूत दावेदारी : सेमीकंडक्टर उद्योग को भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलना भारत के लिए एक रणनीतिक कदम है। आने वाले वर्षों में इससे रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास के नए अवसर खुलेंगे, जिससे देश डिजिटल और औद्योगिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकेगा।

Share

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter