मध्यप्रदेश बना गिद्ध संरक्षण का ग्लोबल हब : हलाली डैम से उड़कर उज्बेकिस्तान पहुंचा दुर्लभ गिद्ध

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विशेष रूप से गिद्ध संरक्षण को लेकर प्रदेश अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हाल ही में एक दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध की लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा ने मध्यप्रदेश को वैश्विक वन्यजीव संरक्षण मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।

जानकारी के अनुसार, यह दुर्लभ गिद्ध दिसंबर 2025 में विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र में घायल और कमजोर अवस्था में मिला था। वन विभाग की टीम ने उसका रेस्क्यू कर भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान और बीएनएचएस के सहयोग से संचालित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर, केरवा में उपचार शुरू कराया। विशेषज्ञों की निगरानी और देखरेख में गिद्ध पूरी तरह स्वस्थ हुआ।

स्वस्थ होने के बाद फरवरी 2026 में इसे रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया। यहां यह करीब एक महीने तक रहा और धीरे-धीरे खुद को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालता रहा।

जीपीएस ट्रैकिंग से सामने आई रोमांचक यात्रा : वन विहार, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बीएनएचएस की संयुक्त पहल के तहत गिद्ध की जीपीएस ट्रैकिंग की जा रही थी। ट्रैकिंग के दौरान सामने आया कि गिद्ध ने 10 अप्रैल 2026 को हलाली डैम से अपनी लंबी उड़ान शुरू की।

राजस्थान से गुजरते हुए यह गिद्ध पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाएं पार कर 4 मई 2026 को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। इस दौरान उसने 3000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।

संरक्षण प्रयासों का मिला वैश्विक सम्मान : विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा गिद्धों की अद्भुत नेविगेशन क्षमता और सहनशीलता का बड़ा उदाहरण है। साथ ही यह मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए अपनाई जा रही वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम की सफलता भी दर्शाती है।

प्रदेश में गिद्ध संरक्षण के लिए लगातार उपचार सुविधाएं, रिसर्च, मॉनिटरिंग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से काम किया जा रहा है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश अब गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी प्रेरणा बनकर उभर रहा है।

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