नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के समीप विकसित किए जा रहे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क सुविधाओं से युक्त यह क्लस्टर भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्ज़ों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर सकता है।
जानकारी के अनुसार, इस क्लस्टर ने अब तक विभिन्न क्षेत्रों की 20 कंपनियों से ₹1,200 करोड़ से अधिक के संभावित निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए हैं। निवेश करने वाली कंपनियां सेमीकंडक्टर पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, एयर कंडीशनर निर्माण, आरएफआईडी तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पुर्ज़े और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
11 कंपनियों ने शुरू किया संचालन
ईएमसी में फिलहाल 11 कंपनियां अपना कार्य शुरू कर चुकी हैं। इन कंपनियों द्वारा अब तक ₹900 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 2,700 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़े उद्योगों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, सप्लाई चेन मजबूत होगी और घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही इससे भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूती मिल सकती है।
निवेश और रोजगार दोनों को मिलेगा लाभ
क्लस्टर में बढ़ते निवेश को देखते हुए आने वाले समय में अधिक कंपनियों के जुड़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।
औद्योगिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के क्लस्टर “मेक इन इंडिया” और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिससे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर

