भोपाल/नीमच : मध्यप्रदेश का नीमच जिला देशभर में अपनी अनोखी हर्बल मंडी के लिए विशेष पहचान बना चुका है। यह ऐसी मंडी मानी जाती है, जहां औषधीय पौधों के लगभग हर हिस्से—फूल, पत्ती, बीज, छाल, जड़ और कांटों तक की खरीद-बिक्री होती है। यहां किसानों को कई औषधीय फसलों के लिए हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये प्रति क्विंटल तक का मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
नीमच हर्बल मंडी की बढ़ती लोकप्रियता के चलते अब केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के किसान भी अपनी उपज लेकर यहां पहुंच रहे हैं। मंडी में औषधीय और मसाला फसलों की समयबद्ध नीलामी, पारदर्शी तौल व्यवस्था तथा शीघ्र भुगतान किसानों के लिए आकर्षण का प्रमुख कारण बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, मंडी परिसर में कई शेड बनाए गए हैं, जहां 40 से अधिक प्रकार की जड़ी-बूटियों और औषधीय फसलों की बोली लगाई जाती है। अश्वगंधा, इसबगोल, तुलसी बीज, अकरकारा, सफेद मूसली, कलौंजी, आजवाइन और अन्य औषधीय उत्पादों की मांग लगातार बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि औषधीय खेती पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर आमदनी दे रही है। कई किसान अब मसाला और हर्बल फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। उनका मानना है कि प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता बढ़ने पर इस क्षेत्र में और बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं।
मंडी प्रबंधन के अनुसार, पिछले वर्षों में यहां आने वाली उपज में लगातार वृद्धि हुई है। आधुनिक तौल प्रणाली, बेहतर अधोसंरचना और व्यापारिक सुविधाओं ने मंडी को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।
प्रदेश में औषधीय फसलों के उत्पादन की बात करें तो मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों की खेती की जा रही है और देश के कुल उत्पादन में बड़ा योगदान मध्यप्रदेश का है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग और सरकारी प्रोत्साहन के कारण भविष्य में औषधीय खेती किसानों के लिए आय का मजबूत विकल्प बन सकती है।

