आठ प्रमुख उद्योगों की रफ्तार धीमी, मई में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 0.5% पर सिमटी : इस्पात, सीमेंट और बिजली ने संभाली विकास की कमान !

नई दिल्ली : देश के आठ प्रमुख उद्योगों (कोर सेक्टर) की विकास गति मई 2026 में सुस्त पड़ती दिखाई दी। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई माह में कोर सेक्टर का संयुक्त सूचकांक (ICI) पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मात्र 0.5 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन ऊर्जा एवं ईंधन से जुड़े कई क्षेत्रों में आई गिरावट ने समग्र विकास दर को सीमित कर दिया।

कोर सेक्टर में शामिल आठ उद्योग—कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली—देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों का प्रदर्शन देश की औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक रुझानों का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्र ने दिखाई मजबूती : मई 2026 के दौरान बिजली उत्पादन में 8.7 प्रतिशत, सीमेंट उत्पादन में 8.4 प्रतिशत और इस्पात उत्पादन में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में जारी निर्माण कार्यों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी के चलते इन क्षेत्रों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।

ऊर्जा क्षेत्र की कमजोरी बनी चिंता : दूसरी ओर ऊर्जा एवं ईंधन आधारित उद्योगों में गिरावट देखने को मिली। मई माह में कोयला उत्पादन 9.3 प्रतिशत, रिफाइनरी उत्पाद 8.7 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस 4.9 प्रतिशत, कच्चा तेल 4.6 प्रतिशत और उर्वरक उत्पादन 0.9 प्रतिशत घट गया। इन क्षेत्रों में आई कमी का सीधा असर कोर सेक्टर की कुल वृद्धि दर पर दिखाई दिया।

अप्रैल-मई में 1.1 प्रतिशत रही संचयी वृद्धि : वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) के दौरान कोर सेक्टर की संचयी वृद्धि दर 1.1 प्रतिशत दर्ज की गई। इस अवधि में इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्र ने सकारात्मक प्रदर्शन बनाए रखा, जबकि अधिकांश ऊर्जा आधारित उद्योग दबाव में रहे।

उद्योग जगत की नजर अगले महीनों पर : आर्थिक जानकारों का मानना है कि निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों में तेजी से इस्पात, सीमेंट और बिजली की मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि ऊर्जा क्षेत्र में लगातार जारी गिरावट भविष्य में औद्योगिक विकास की गति को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों के आंकड़े देश की औद्योगिक सेहत का महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

Share

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter