दतिया | दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के नामांकन के साथ चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है, लेकिन कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने ही नाराज़ नेताओं को साधने की है। सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अवधेश नायक की हो रही है, जो कांग्रेस की नामांकन सभा से दूरी बनाए रहे। उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। अब सवाल यही है कि क्या दिग्विजय सिंह की सार्वजनिक माफी के बाद अवधेश नायक पार्टी के साथ खड़े होंगे या कोई नया राजनीतिक फैसला लेंगे।
सभा से दूरी, नाराज़गी खुलकर आई सामने : एक मीडिया चैनल से बातचीत में अवधेश नायक ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले उन्हें प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन बाद में टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को दे दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उस समय पार्टी नेतृत्व ने भरोसा दिलाया था कि भविष्य में उन्हें अवसर मिलेगा, लेकिन इस बार भी उन्हें टिकट नहीं मिला।
नायक ने यह भी कहा कि कुछ दिन पहले उनकी मुलाकात वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से हुई थी। उनके अनुसार, दिग्विजय सिंह ने सर्वे में सकारात्मक फीडबैक मिलने की बात कही, लेकिन उनके भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पुराने संबंधों को लेकर भी चर्चा की थी। अवधेश नायक का कहना है कि प्रदेश नेतृत्व के फैसले से वे आहत हैं।
दिग्विजय सिंह ने मंच से मांगी माफी : कांग्रेस की जनसभा में दिग्विजय सिंह ने अवधेश नायक का नाम लेते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि वर्ष 2023 में उन्होंने उनके टिकट का विरोध किया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नायक ने चुनाव में पूरी निष्ठा से पार्टी के लिए काम किया और यदि उनके किसी व्यवहार से उन्हें ठेस पहुंची हो तो वे उसके लिए क्षमा चाहते हैं। दिग्विजय की इस टिप्पणी को कांग्रेस की ओर से नाराज़गी दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नरोत्तम मिश्रा ने भी मंच से साधा निशाना : भाजपा की सभा में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भी अवधेश नायक की अनुपस्थिति का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने मंच से पूछा कि “अवधेश चाचा कहां हैं, नामांकन भरवाने क्यों नहीं आए?” साथ ही उन्होंने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को लेकर भी कांग्रेस पर टिप्पणी की। इन बयानों के बाद अवधेश नायक की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
क्या बदलेंगे चुनावी समीकरण? : अवधेश नायक पहले भाजपा में रहे हैं और क्षेत्र के ब्राह्मण समाज में उनकी पहचान मानी जाती है। 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के बाद वे कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में आए थे। इस बार भी उन्होंने नामांकन फॉर्म लिया था और टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
अब जबकि भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है और कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है, ऐसे में अवधेश नायक का अगला कदम उपचुनाव की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल उन्होंने यह जरूर कहा है कि “मेरे सामने सभी विकल्प खुले हैं, मैं विचार कर रहा हूं।” ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी राजनीतिक रणनीति पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।

