नई दिल्ली | ग्रामीण भारत में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार का स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मेंटरिंग और समुदाय आधारित संस्थागत सहयोग के जरिए यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि व्यवसायों को शुरू करने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। 30 जून 2026 तक SVEP के तहत देशभर में 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहयोग दिया जा चुका है।
86% उद्यमी SC, ST, अल्पसंख्यक और OBC समुदायों से : SVEP ने सामाजिक समावेश और उद्यमिता के अवसरों तक समान पहुंच पर विशेष जोर दिया है। कार्यक्रम से जुड़े करीब 86 प्रतिशत उद्यमी SC, ST, अल्पसंख्यक और OBC समुदायों से आते हैं। स्वयं सहायता समूह (SHG), कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलों के साथ तालमेल बनाकर SVEP ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच को और मजबूत किया है।
2016 में शुरू हुआ था SVEP : SVEP की शुरुआत वर्ष 2016 में दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की उप-योजना के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों और उनके परिवारों को कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के तहत आर्थिक सहायता, बिजनेस मैनेजमेंट ट्रेनिंग, सॉफ्ट स्किल डेवलपमेंट, बिजनेस डेवलपमेंट सेवाएं और संस्थागत सहयोग दिया जाता है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीण भारत में उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा : SVEP का फोकस महिलाओं, वंचित समुदायों और कम पढ़े-लिखे लोगों को उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर भी है। कार्यक्रम के तहत असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमों को सहयोग मिला है।
सरकार के अनुसार, जून 2026 के मध्य तक DAY-NRLM के तहत 10.29 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है, जिससे ग्रामीण महिलाओं और परिवारों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिली है।
महिला उद्यमियों को मिल रहा आगे बढ़ने का अवसर : SVEP के जरिए ग्रामीण महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने और उसे विस्तार देने के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिल रही है। महाराष्ट्र की भाग्यश्री लोंढे इसका एक उदाहरण हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मसाला, पापड़ और अचार का व्यवसाय शुरू किया। SVEP के तहत मिले ₹45,000 के कम्युनिटी एंटरप्राइज फंड लोन की मदद से उन्होंने स्थानीय कच्चे माल का उपयोग कर अपना कारोबार बढ़ाया।
उनके व्यवसाय को महालक्ष्मी सरस 2019-20 में पहचान मिली, जहां उन्होंने दस दिनों में ₹5 लाख की बिक्री की। आगे चलकर उनके कारोबार ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए।
फरवरी 2026 तक ₹942.09 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा जारी : SVEP के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने फरवरी 2026 तक ₹942.09 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा जारी किया है। यह वर्ष 2016 में कार्यक्रम की शुरुआत से जनवरी 2018 के बीच जारी किए गए ₹112.39 करोड़ की तुलना में लगभग 738 प्रतिशत अधिक है।
हर ब्लॉक में उद्यमिता को बढ़ावा देने की व्यवस्था : SVEP को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के माध्यम से लागू किया जाता है। कार्यक्रम के तहत प्रति ब्लॉक ₹6.50 करोड़ का प्रावधान और प्रति उद्यम औसतन ₹27,083 का निवेश शामिल है।
ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स सेंटर-एंटरप्राइज प्रमोशन (BRC-EP) कार्यक्रम के संचालन में सहयोग करते हैं। प्रशिक्षित CRP-EP उद्यमियों को बिजनेस प्लानिंग, प्रशिक्षण, मेंटरिंग, क्रेडिट और बाजार से जोड़ने में सहायता करते हैं। स्वयं सहायता समूह और सामुदायिक संस्थाएं संभावित उद्यमियों की पहचान करने से लेकर व्यवसाय स्थापित करने और उसके प्रदर्शन की निगरानी तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
60% लाभार्थियों का होना जरूरी है महिला : SVEP के तहत कम से कम 60 प्रतिशत लाभार्थियों का महिला होना अनिवार्य है। इसके अलावा दिव्यांगों, SC, ST और अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाता है।
कार्यक्रम में कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP) की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। कम से कम 90 प्रतिशत CRP-EP को स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों से चुना जाता है, जबकि इस कैडर में कम से कम 60 प्रतिशत महिलाएं होती हैं। प्रत्येक CRP-EP करीब 50 उद्यमियों को प्रशिक्षण, मेंटरिंग और क्रेडिट उपलब्ध कराने में सहायता करता है।
SVEP से जुड़े 99% उद्यम मुनाफे में : क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) द्वारा किए गए मध्यावधि मूल्यांकन में SVEP के ग्रामीण कारोबार और आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव सामने आए। मूल्यांकन के अनुसार, SVEP से सहायता प्राप्त 99 प्रतिशत उद्यम मुनाफे में रहे, जबकि इन उद्यमों का परिवार की कुल आय में करीब 57 प्रतिशत योगदान रहा।
मूल्यांकन में उद्यमों से होने वाली औसत मासिक कमाई करीब ₹39,000 बताई गई। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमों की औसत मासिक कमाई करीब ₹47,800 रही। इसके अलावा 96 प्रतिशत उद्यमियों ने अपनी बचत में बढ़ोतरी की बात कही, जबकि 75 प्रतिशत उद्यम महिलाओं के स्वामित्व या प्रबंधन में पाए गए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम : SVEP ने ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक बदलाव के एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित किया है। महिलाओं, SC/ST समुदायों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को अवसर देकर यह कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर आय, रोजगार और बचत बढ़ाने में मदद कर रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत सामुदायिक संस्थाओं, वित्तीय सहायता और लगातार मेंटरिंग के जरिए SVEP ने यह दिखाया है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर गांवों में भी उद्यमिता की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय रोजगार पैदा करने और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

