दतिया | दतिया विधानसभा उपचुनाव का मतदान खत्म होने के बाद अब पूरे जिले की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। हालांकि, इससे पहले सामने आए रुद्रा रिसर्च के एग्जिट पोल ने चुनावी नतीजों को लेकर सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है। सर्वे में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी दूसरे स्थान पर बताए गए हैं। वहीं, आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव को मिलने वाले अनुमानित वोट शेयर को भी चुनावी समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, यह सिर्फ एक एग्जिट पोल का अनुमान है। दतिया की जनता ने किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाया है, इसका आधिकारिक जवाब EVM की मतगणना के बाद ही सामने आएगा।
Exit Poll में कांग्रेस को 44%, BJP को 39% वोट का अनुमान : रुद्रा रिसर्च के सर्वे के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को करीब 44 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं भाजपा के आशुतोष तिवारी के खाते में 39 प्रतिशत वोट जाने की संभावना जताई गई है। यानी सर्वे के आंकड़ों में कांग्रेस को भाजपा पर करीब 5 प्रतिशत की बढ़त दिखाई गई है।
वहीं ASP प्रत्याशी दामोदर यादव को 15 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जबकि अन्य प्रत्याशियों के हिस्से में करीब 2 प्रतिशत वोट जाने की संभावना बताई गई है।
रुद्रा रिसर्च के अनुमान के मुताबिक—
● घनश्याम सिंह, कांग्रेस — 44%
● आशुतोष तिवारी, भाजपा — 39%
● दामोदर यादव, ASP — 15%
● अन्य — 2%
हालांकि, इन आंकड़ों को अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति 3 अगस्त को मतगणना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
71.44% मतदान के बाद EVM में बंद है प्रत्याशियों की किस्मत : दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान हुआ था। निर्वाचन विभाग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार विधानसभा क्षेत्र के सभी 291 मतदान केंद्रों पर कुल 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। क्षेत्र के कुल 2,20,410 मतदाताओं में से करीब 1.57 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
आंकड़ों के अनुसार पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09%, जबकि महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 68.48% रहा। मतदान समाप्त होने के साथ ही भाजपा, कांग्रेस, ASP सहित चुनाव मैदान में मौजूद सभी प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य EVM में बंद हो गया।
2023 के मुकाबले करीब 9% कम मतदान, किसे मिला फायदा? : दतिया विधानसभा सीट पर 2023 के चुनाव में करीब 80.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार यह आंकड़ा घटकर 71.44 प्रतिशत रह गया। यानी पिछली विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 9 प्रतिशत कम मतदान हुआ है।
अब चुनावी विश्लेषण का सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदान में आई इस गिरावट का फायदा किस दल को मिला और किसे इसका नुकसान उठाना पड़ा? क्या किसी खास वर्ग के मतदाताओं की कम वोटिंग ने चुनावी गणित बदला या फिर इसका असर सभी प्रमुख दलों पर लगभग समान रहा? इन सवालों का जवाब मतगणना के बाद ही मिल सकेगा।
कांग्रेस में चुनाव के बाद सामने आई अंदरूनी खींचतान : मतदान खत्म होने के बाद कांग्रेस के भीतर की राजनीतिक खींचतान भी चर्चा में आ गई है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की चुनावी भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।
वहीं राजेंद्र भारती ने भी घनश्याम सिंह की उम्मीदवारी और राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने दतिया से टिकट दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए घनश्याम सिंह के राजनीतिक सफर और भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।
दोनों नेताओं के बीच सामने आए आरोप-प्रत्यारोप के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का चुनाव परिणाम पर कितना असर पड़ा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
ASP के वोट शेयर पर भी टिकी नजरें : दतिया उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव भी चुनावी समीकरण में एक अहम फैक्टर के रूप में देखे जा रहे हैं। रुद्रा रिसर्च के एग्जिट पोल में उन्हें 15 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है।
यदि वास्तविक परिणाम में भी ASP का वोट शेयर इसके आसपास रहता है और भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला करीबी होता है, तो दामोदर यादव को मिले वोट जीत-हार के अंतर को प्रभावित करने वाले साबित हो सकते हैं। ऐसे में 3 अगस्त को आने वाले परिणाम में सिर्फ विजेता प्रत्याशी ही नहीं, बल्कि ASP के प्रदर्शन पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी।
संभावित क्रॉस वोटिंग की भी चर्चा : दतिया में मतदान के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच चल रही चर्चाओं में भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों के भीतर कथित नाराजगी की बात भी सामने आ रही है। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में पार्टी से असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं का रुख मतदान के दौरान अलग हो सकता है और संभावित रूप से क्रॉस वोटिंग भी हुई हो।
हालांकि, यह फिलहाल स्थानीय चर्चाओं और राजनीतिक आकलनों तक ही सीमित है। इसकी वास्तविक पुष्टि किसी आधिकारिक आंकड़े से नहीं हुई है। लेकिन यदि भाजपा और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर कम रहा, तो ऐसे संभावित वोट चुनावी नतीजे को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसी के साथ परिणाम के बाद दोनों दलों के भीतर यह समीक्षा भी शुरू हो सकती है कि किन इलाकों में पार्टी का वोट अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा और किन नेताओं या स्थानीय समीकरणों का असर चुनाव पर पड़ा।
Exit Poll के अनुमान और EVM के फैसले के बीच अब सिर्फ दो दिन : रुद्रा रिसर्च का एग्जिट पोल कांग्रेस को बढ़त दिखा रहा है, लेकिन दतिया की जनता ने वास्तव में किसे अपना समर्थन दिया है, इसका फैसला अभी बाकी है। एग्जिट पोल सर्वे और अनुमान पर आधारित होते हैं, जबकि अंतिम परिणाम EVM की आधिकारिक मतगणना के बाद ही तय होता है। ऐसे में सर्वे के अनुमान और वास्तविक नतीजों में अंतर की संभावना हमेशा बनी रहती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या घनश्याम सिंह की एग्जिट पोल में दिखाई गई बढ़त वास्तविक जीत में बदल पाएगी? क्या आशुतोष तिवारी सर्वे के आंकड़ों को पलटकर भाजपा के पक्ष में परिणाम लाएंगे? या फिर दामोदर यादव को मिला वोट शेयर दोनों प्रमुख दलों के बीच के समीकरण को पूरी तरह बदल देगा?
3 अगस्त को खुलेगा EVM में बंद दतिया का फैसला : 2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों के अंतर से हराया था। इस बार उपचुनाव में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी बदल चुके हैं और चुनावी परिस्थितियां भी अलग हैं। ऐसे में 3 अगस्त का परिणाम सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि यह भी बताएगा कि दतिया में जनता ने मौजूदा राजनीतिक समीकरणों, प्रत्याशियों की छवि और चुनावी अभियान में से किस पर भरोसा जताया।
30 जुलाई को दतिया के मतदाताओं ने अपना फैसला EVM में दर्ज कर दिया है। अब 3 अगस्त को मतगणना के साथ वही फैसला सामने आएगा। एग्जिट पोल में कांग्रेस आगे है, भाजपा मुकाबले में है और ASP के वोटों को गेमचेंजर माना जा रहा है। ऐसे में अब दतिया की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या Exit Poll सही साबित होगा या EVM कोई बिल्कुल अलग कहानी सुनाएगी?.

