हैदराबाद | सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लंबे समय से अटके भुगतान विवादों के समाधान की दिशा में बड़ी पहल सामने आई है। तेलंगाना के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय ने MSME मंत्रालय के सहयोग से हैदराबाद स्थित FTCCI में ‘परिश्रम अदालत’ का आयोजन किया। इसमें सुलह प्रक्रिया के जरिए 8.29 करोड़ रुपये के 65 विलंबित भुगतान मामलों का समाधान किया गया।
इस पहल में MSME इकाइयों के साथ खरीदार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, MSME सुविधा परिषदें, विवाद समाधान संस्थाएं और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हुए।
रुका भुगतान छोटे कारोबार के लिए बड़ी परेशानी : MSME कारोबारियों के लिए समय पर भुगतान नहीं मिलना सिर्फ बकाया रकम का मामला नहीं है। इसका सीधा असर कर्मचारियों की सैलरी, कच्चा माल खरीदने, कर्ज चुकाने और कारोबार के विस्तार पर पड़ता है। परिश्रम अदालत के जरिए ऐसे मामलों को बातचीत और सुलह के माध्यम से जल्द सुलझाने पर जोर दिया गया।
कई कारोबारियों को वापस मिला लंबित पैसा : कार्यक्रम में कारोबारियों ने बताया कि विवाद समाधान से उन्हें न केवल बकाया रकम मिली, बल्कि कारोबार में दोबारा भरोसा और स्थिरता भी लौटी।
- नीमस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस के 11 में से 9 भुगतान मामलों का समाधान हुआ।
- नागार्जुन एग्रो केमिकल्स को लंबे समय से अटके भुगतान की वसूली में मदद मिली और खरीदार के साथ कारोबारी संबंध भी कायम रहे।
- श्री सॉल्यूशंस ने दो साल से अधिक समय से लंबित भुगतान मामलों में करीब 2-3 महीने के भीतर चार मामलों का समाधान कर लगभग 30 लाख रुपये की वसूली की।
- करीमनगर के एक दिव्यांग कारोबारी के करीब 11 लाख रुपये के लंबित भुगतान का भी समाधान हुआ।
- हैदराबाद अमोनिया एंड केमिकल्स ने ODR प्रक्रिया के जरिए करीब 54 लाख रुपये की वसूली की।
ODR से ऑनलाइन समाधान को बढ़ावा : कार्यक्रम में ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) व्यवस्था की भूमिका पर भी चर्चा हुई। 2025 में शुरू किए गए ODR प्लेटफॉर्म के जरिए MSME से जुड़े भुगतान विवादों को डिजिटल माध्यम से समाधान प्रक्रिया तक पहुंचाने की सुविधा दी जा रही है।
तेलंगाना में ODR प्रणाली के माध्यम से अब तक 800 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें करीब 85 मामलों का समाधान हो चुका है।
मकसद सिर्फ केस खत्म करना नहीं, कारोबार को आगे बढ़ाना : परिश्रम अदालत में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी विवाद समाधान व्यवस्था की सफलता केवल निपटाए गए मामलों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। असली असर तब है, जब लंबित भुगतान मिलने के बाद छोटे कारोबारी अपनी कैश फ्लो स्थिति सुधार सकें, कारोबार जारी रख सकें और नए अवसरों पर काम कर सकें।
इस पहल के जरिए सुलह, संस्थागत व्यवस्था और डिजिटल तकनीक को एक साथ इस्तेमाल कर MSME कारोबारियों के लिए भुगतान विवादों का समाधान आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

